मिट्टी की नमी की निगरानी करेगा निसार हर 12 दिन में देगा डाटा ISRO ने किया साफ (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इसरो ने शनिवार को कहा कि नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (निसार) भारत में हर 12 दिन में 100 मीटर रिजाल्यूशन में मिट्टी की नमी का डाटा उपलब्ध कराएगा। निसार का एस और एल बैंड भारतीय भूभाग को लगातार स्कैन कर रहा है।
इससे हर 12 दिनों में हाई रिजाल्यू्शन विस्तृत डाटा मिल सकेगा। इस डाटा से सिंचाई और सूखा प्रबंधन और फसल स्वास्थ्य की निगरानी में किसानों की मदद मिलेगी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा कि मिट्टी की नमी फसल स्वास्थ्य, सिचाई की आवश्यकताओं और सूखे के जोखिम काप्रमुख संकेतक है और यह भारत की कृषि और जल प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
एस और एल बैंड डाटा का उपयोग कर देश के विविध कृषि-जलवायु क्षेत्रों- सिंचित मैदान, वर्षा आधारित खेती, अर्ध-शुष्क इलाकों और अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में मिट्टी की नमी का सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा। मिट्टी की नमी निकालने का एल्गोरिदम स्पेस एप्लिकेशंस सेंटर (एसएसी- इसरो) में विकसित किया गया है, जिससे डाटा की विश्वसनीयता और वैज्ञानिक सटीकता सुनिश्चित होती है।
इसरो ने किया स्पष्ट
इसरो ने कहा, निसार मिट्टी की नमी की की लगभग रियल टाइम निगरानी करने में सक्षम है। निगरानी से सिंचाई योजना, सूखे से निपटने की तैयारी, कृषि-मौसम संबंधी सलाह और क्षेत्रीय जल संसाधन प्रबंधन में जिलों के लिए सहायता मिलेगी।
इसरो ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय अभियानों का समर्थन करने के लिए राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र में हर 12 दिनों में दो अवलोकनों के साथ 100 मीटर लेवल-4 का डाटा मिलेगा और भूनिधि पोर्टल के माध्यम से प्रसारित किए जाएंगे, जिससे देशभर के किसानों, शोधकर्ताओं, सरकारी एजेंसियों और गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए निर्बाध पहुंच सुनिश्चित होगी।
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