पार्किंसंस और वैस्कुलर पार्किंसोनिज्म में अंतर अब आसान, मरीजों को मिलेगा सटीक उपचार।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। पार्किंसंस रोग और उससे मिलते-जुलते वैस्कुलर पार्किंसोनिज्म (वीपी) के बीच अंतर करना अब पहले से आसान होगा। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) और किंग एडवर्ड मेमोरियल (केईएम) अस्पताल मुंबई के शोधकर्ताओं ने तुलनात्मक अध्ययन में स्पष्ट किया है कि कैसे ये दोनों बीमारियां एक-दूसरे से भिन्न हैं और इनकी पहचान के सटीक तरीके क्या हैं।
शोधकर्ताओं ने लगभग 80 मरीजों (40 पार्किंसंस और 40 वैस्कुलर पार्किंसोनिज्म) के क्लीनिकल व रेडियोलाजिकल डेटा का अध्ययन किया है, इसमें कई प्रमुख अंतर पाए गए हैं। सामान्य पार्किंसंस की तुलना में वैस्कुलर पार्किंसोनिज्म अधिक उम्र में शुरू होता है। वीपी के मरीजों में चलने-फिरने की समस्या और मोटर स्कोर (मरीज की शारीरिक गतिविधियों व मूवमेंट की क्षमता मापने का पैमाना) सामान्य पार्किंसंस के मुकाबले काफी खराब पाए गए।
वीपी के मरीजों की याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता काफी कम हो जाती है। उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसे वैस्कुलर रिस्क फैक्टर्स वीपी के मरीजों में अधिक देखे गए। रेडियोलाजिकल जांच (एमआरआइ) में वीपी के मरीजों के मस्तिष्क में विशिष्ट बदलावों का पता चला है। मस्तिष्क के वेंट्रिकल्स के आसपास इस्केमिक बदलाव (रक्त की कमी के निशान) मिले। मस्तिष्क संकुचन और छोटे-छोटे घाव भी मिले हैं।
आइएमएस बीएचयू के न्यूरोलाजी विभागाध्यक्ष डा. अभिषेक पाठक ने बताया कि यदि किसी बुजुर्ग मरीज में अचानक चलने में कठिनाई और याददाश्त में गिरावट जैसे लक्षण दिखें और एमआरआइ में रक्त वाहिकाओं संबंधी विकार मिलते हैं तो वह सामान्य पार्किंसंस के बजाय वैस्कुलर पार्किंसोनिज्म हो सकता है। यह खोज डाक्टरों को मरीजों के बेहतर इलाज और सटीक डायग्नोसिस में मदद करेगी।
वैस्कुलर पार्किंसोनिज्म असामान्य लक्षण है, जो मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में समस्या (जैसे छोटा स्ट्रोक या रक्त प्रवाह कम होना) के कारण होता है। अक्सर लोग इसे सामान्य पार्किंसंस समझ लेते हैं, लेकिन इसके कारण और प्रभाव अलग होते हैं। इस शोध को कोरियन मूवमेंट डिसआर्डर सोसाइटी के जर्नल एनाल्स आफ मूवमेंट डिसआर्डर ने प्रकाशित किया है।
शोध टीम में बीएचयू न्यूरोलाजी के डा. आनंद कुमार और डा. आशीष वर्मा के अलावा केईएम अस्पताल मुंबई की डा. शिवानी रथ भी शामिल रहे।
सामान्य पार्किंसंस और वैस्कुलर पार्किंसोनिज्म में अंतर सामान्य पार्किंसंस - वैस्कुलर पार्किंसोनिज्म शुरुआत -धीरे-धीरे एक हाथ में कंपन - अचानक या छोटे स्ट्रोक के बाद, दोनों तरफ समान असर। |