भारत की खुदरा महंगाई दर वित्त वर्ष 2026 में नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI सीरीज के तहत 2.75 प्रतिशत रही। 12 फरवरी को जारी आंकड़ों के साथ एक दशक से ज्यादा समय बाद महंगाई मापने की सीरीज में बड़ा बदलाव किया गया है। अब इसका आधार वर्ष 2012 की जगह 2024 कर दिया गया है। पुराने आधार वर्ष वाली सीरीज के मुताबिक पिछले महीने महंगाई 1.33 प्रतिशत थी।
पिछले साल के आखिर से बढ़ने लगी थी महंगाई
पुरानी सीरीज के अनुसार महंगाई ने पिछले साल के आखिर में रफ्तार पकड़नी शुरू की थी। नवंबर में यह 0.71 प्रतिशत थी, जो दिसंबर में बढ़कर 1.33 प्रतिशत हो गई थी।
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नई सीरीज के आंकड़े बताते हैं कि लगातार तीन महीनों से कीमतों में धीरे धीरे बढ़ोतरी हो रही है। नवंबर में सूचकांक 104.01 था, दिसंबर में 104.10 और जनवरी में बढ़कर 104.46 हो गया।
खाद्य वस्तुओं का वजन 40% से नीचे
संशोधित CPI में सबसे अहम बदलाव खाद्य वस्तुओं के वजन में कमी है। पहली बार खाने पीने का हिस्सा 40 प्रतिशत से नीचे आ गया है। अब गैर खाद्य श्रेणियों का हिस्सा 60 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है, जो पहले करीब 45 प्रतिशत था।
इसके अलावा ग्रामीण खपत को ज्यादा महत्व दिया गया है। यह बदलाव इस बात को दिखाता है कि कुल मांग में ग्रामीण इलाकों की भूमिका बढ़ रही है।
खाद्य महंगाई कितनी रही?
नई सीरीज के तहत खाद्य महंगाई 2.13 प्रतिशत रही। हालांकि अब इसका वेटेज कम हो गया है। इसलिए हेडलाइन महंगाई पर इसका असर पहले जितना ज्यादा नहीं रहेगा।
फूड और बेवरेज कैटेगरी में महंगाई 2.11 प्रतिशत रही। इसका वेटेज 37 प्रतिशत है। टमाटर की कीमतों में 64.8 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। नारियल और नारियल तेल की महंगाई भी दो अंकों में बनी रही।
सोना-चांदी से बढ़ा पर्सनल केयर खर्च
पर्सनल केयर कैटेगरी में महंगाई 19.02 प्रतिशत रही। इसमें चांदी के गहनों की महंगाई 160 प्रतिशत और सोने की 47 प्रतिशत रही।
शिक्षा सेवाओं में महंगाई 3.35 प्रतिशत रही। रेस्टोरेंट और आवास सेवाओं में महंगाई 2.87 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है।
नई CPI टोकरी में क्या बदला?
नई सीरीज में CPI की टोकरी का दायरा भी बढ़ाया गया है। पहले जहां 299 वस्तुएं शामिल थीं, अब 350 से ज्यादा वस्तुएं शामिल हैं। साथ ही ज्यादा बाजारों से कीमतें जुटाई जा रही हैं।
नई जोड़ी गई वस्तुओं में वायरलेस ईयरफोन जैसे एयरपॉड्स, पालतू पशुओं का खाना, सैनिटाइजर, फिटनेस बैंड और एयर प्यूरीफायर शामिल हैं। इसका मकसद बदलते उपभोग पैटर्न को दिखाना है, जो शहरीकरण, बढ़ती आय और महामारी के बाद की स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़ा है।
किन कैटेगरी का वेटेज बढ़ा?
- आवास, पानी, बिजली, गैस और अन्य ईंधन का हिस्सा बढ़कर 17.7 प्रतिशत हो गया है, जो पहले 16.9 प्रतिशत था।
- स्वास्थ्य सेवाओं का वजन 5.9 प्रतिशत से बढ़कर 6.1 प्रतिशत हो गया है।
- परिवहन और संचार का हिस्सा 8.6 प्रतिशत से बढ़कर 12.4 प्रतिशत हो गया है।
यह बढ़ती आवाजाही, डिजिटल कनेक्टिविटी और सेवाओं के ज्यादा इस्तेमाल को दिखाता है।
महंगाई मापने के तरीके में क्या बदलेगा?
नई सीरीज के बाद महंगाई के आंकड़े अब अल्पकालिक खाद्य कीमतों की तेजी से कुछ हद तक कम प्रभावित होंगे। इसके बजाय सेवाओं, आवास और वैकल्पिक खर्च के रुझान ज्यादा साफ नजर आएंगे।
यानी अब महंगाई का आंकड़ा केवल सब्जी और अनाज की कीमतों से नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली और सेवा क्षेत्र की लागत से भी ज्यादा प्रभावित होगा।
क्या नई CPI सीरीज में घटेगा फूड वेटेज, किन राज्यों में घटेगी या बढ़ेगी महंगाई? जानिए डिटेल |
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