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सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, देहरादून। मां की मौत के बाद कथित पिता ने नवजात शिशु को अपनाने से इन्कार कर दिया। मृतका बिन ब्याही मां बनी थी और शिशु अस्पताल में भर्ती था। ऐसे में बेघर नवजात के लिए बाल कल्याण समिति के पदाधिकारी फरिश्ता बनकर आए।
पदाधिकारियों ने शिशु को अस्थायी सुर्पुदगी में लेते हुए उसे शिशु गृह में भेज दिया। इससे पहले शिशु का मेडिकल कराया गया।
मंगलवार को पटेलनगर स्थित श्री महंत इंद्रेश अस्पताल में एक अविवाहित युवती की प्रसव के दौरान मृत्यु हो गई थी।
अस्पताल में ही मृतका के स्वजन और शिशु के कथित पिता के बीच शिशु की देखरेख और उसके लालन-पालन को लेकर विवाद हो गया। मृतका के स्वजन के दबाव में कथित पिता ने पहले शिशु को अपनाने पर सहमति दी, लेकिन बाद में वह मुकर गया।
ऐसे में निक्कू वार्ड में भर्ती नवजात को लेकर अस्पताल प्रबंधन की चिंता भी बढ़ गई। अस्पताल प्रबंधन ने जिला बाल कल्याण समिति के पदाधिकारियों से संपर्क किया। नवजात की सुर्पुदगी का अनुरोध भी किया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए समिति पदाधिकारी नीता कांडपाल ने तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन को नवजात की सुर्पुदगी के संबंध में आदेशित किया। साथ ही बाल कल्याण समिति के सभी पदाधिकारी अस्पताल पहुंचे।
निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद नवजात की अस्थायी सुर्पुदगी लेकर शिशु गृह भेजा गया। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन, बाल कल्याण समिति व चाइल्ड हेल्पलाइन से जुड़े सदस्य व अधिकारी मौजूद रहे।
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