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गोरखपुर रेलवे अस्पताल से शुगर, गैस और ब्लड प्रेशर की दवा गायब

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ललित नारायण मिश्र केंद्रीय रेलवे अस्पताल। जागरण  



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। ललित नारायण मिश्र केंद्रीय रेलवे अस्पताल की ओपीडी में बुधवार को सुबह साढ़े नौ बजे के आसपास दवा वितरण काउंटरों के सामने लंबी लाइन लगी थी। बुजुर्ग मरीज और महिलाएं दवा के लिए परेशान थे। हाथ में पर्ची लेकर कोई चिकित्सक के पास दौड़ रहा था, कोई काउंटर पर बैठे रेलकर्मी से भिड़ रहा था। अधिकतर पर्ची पर लिखी गई दवाइयां नहीं मिल रही थी। पर्ची पर लिखी गई पांच में से किसी तो तीन तो किसी को दो ही दवा मिल रही थी।  

घंटों जद्दोजहद के बाद किसी के हाथ दवा लगी तो कई निराश वापस लौट गए। दरअसल, यह परेशानी अब रोज की हो गई है। काउंटरों पर दवा को लेकर मरीज और रेलकर्मी के बीच कहासुनी हो रही है। रेलवे अस्पताल से शुगर, बीपी, गैस, थायराइड और ब्लड प्रेशर आदि की दवा ही लगभग गायब हो गई है। इंसुलीन के लिए लोग अस्पताल का चक्कर लगा रहे हैं। दरअसल, रेलवे अस्पताल के चिकित्सक जो दवा पर्ची पर लिख रहे हैं, वह मिल ही नहीं रही।  

जानकारों का कहना है कि ओपीडी में बैठने वाले चिकित्सक भी अधिकतर वही दवा लिख रहे हैं जो काउंटर पर नहीं मिल रही। जबकि, वह जान रहे हैं कि फलां दवा का टोटा है। चिकित्सकों के सामने अस्पताल में मौजूद दवाइयों की लिस्ट रहती है, इसके बाद भी वे या तो जानबूझ़कर मरीजों को परेशान कर रहे या अस्पताल प्रबंधन के सिस्टम पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।

काउंटर पर बैठे कर्मी भी कंपोजीशन का हवाला देते हुए मरीजों को वापस कर दे रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन भी मरीजों की जरूरी दवाओं को लेकर उदासीन बना हुआ है। जानकारी के बाद भी आवश्यक दवाइयों की आपूर्ति समय से नहीं करा पा रहा। रेलवे अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डा. मोहम्मद एए खान कहते हैं कि वित्तीय वर्ष के अंत में दवाओं की आपूर्ति कम हो जाती है। लेकिन, बीमारी तो कम नहीं होती।

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अस्पताल प्रबंधन को समय से दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित कर लेनी चाहिए। आखिर, शुगर और बीपी आदि के मरीज दवा के लिए कहां जाएंगे। एनई रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) के महामंत्री बसंत लाल चतुर्वेदी कहते हैं कि वित्तीय वर्ष के अंत में निर्माण कार्य तो नहीं बंद हो रहा।

दवा खरीद के नाम पर अस्पताल प्रबंधन हाथ खड़ा कर दे रहा, लेकिन निर्माण कार्य में बजट बाधा नहीं बन रहा। फर्श तोड़कर टाइल्स लगाए जा रहे हैं, लेकिन समय से दवाइयों की खरीद नहीं की जा रही है। ओपीडी के नवनिर्माण और नई इमरजेंसी के बाद भी मरीजों को दवा के लिए भटकना पड़ रहा है।
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