फर्जी ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र से नौकरी पाने की विजिलेंस जांच।
जागरण संवाददाता, मंडी। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के फर्जी प्रमाणपत्र से सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर भर्ती में फर्जीवाड़े के बाद अब शिक्षा विभाग में भी ऐसा ही मामला सामने आया है।
मंडी जिला में ईडब्ल्यूएस के कथित फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर टीजीटी नान मेडिकल की नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी है। यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो आरोपितों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा।
शिकायतकर्ता के अनुसार शिक्षा विभाग में 2024 में बैचवाइज आधार पर टीजीटी नान मेडिकल की नियुक्तियां हुई थीं। इसी दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने खुद को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का बताकर ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया और नौकरी हासिल कर ली।
आरोप है कि इन शिक्षकों के परिवारों की वार्षिक आय लाखों रुपये है, इसके बावजूद पंचायत प्रतिनिधियों और राजस्व विभाग के कुछ कर्मियों से मिलीभगत कर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाए गए। शिकायत के बाद विजिलेंस ने शिक्षा विभाग से संबंधित शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया का पूरा रिकॉर्ड तलब कर लिया है।
इसके साथ ही आरोपितों के ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों की सत्यता जांचने के लिए उनके संबंधित क्षेत्रों के तहसीलदारों और ग्रामीण राजस्व अधिकारियों से भी दस्तावेज मांगे गए हैं। रिकार्ड के परीक्षण से यह स्पष्ट होगा की प्रमाणपत्र नियमों के अनुसार जारी हुए थे या नहीं।
यदि जांच में फर्जीवाड़ा साबित होता है तो आरोपितों की न केवल गिरफ्तारी होगी, बल्कि नौकरी से भी हाथ धोना पड़ सकता है। विजिलेंस इससे पहले जिले के चार आयुर्वेदिक मेडिकल आफिसर के खिलाफ केस दर्ज कर चुकी है, जिसमें एक डॉक्टर की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि तीन अन्य पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। |
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