MP में जीबीएस का प्रकोप नीमच जिले में दो बच्चों की मौत (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के अलग-अलग शहरों में गिलियन-बारे सिंड्रोम (जीबीएस) के मामले सामने आ रहे हैं। नीमच जिले के मनासा क्षेत्र में अब तक दो बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 18 से अधिक संक्रमित अस्पताल में भर्ती हैं। नीमच शहर में भी एक केस की पुष्टि हुई है।
नीमच में कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के नेतृत्व में जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है और मनासा में घर-घर सर्वे किया जा रहा है। नीमच के शासकीय मेडिकल कालेज के साथ ही उज्जैन और भोपाल के स्वास्थ्य विभाग की टीमें बीमारी की रोकथाम में जुटी हैं।
मनासा के बीएमओ डा. उमेश बसेर ने बताया कि अब तक क्षेत्र में छह मरीजों में जीबीएस की पुष्टि हुई है, जिनमें दो मरने वाले भी शामिल हैं। बाकी संदिग्ध हैं, जिनका इलाज किया जा रहा है। वहीं, ग्वालियर के एक निजी अस्पताल में एक मरीज की मौत हो गई है। मंदसौर में भी एक केस सामने आया है। हालांकि, दोनों मामलों की पुष्टि नहीं होने पर संदिग्ध माना जा रहा है।
यह है जीबीएस
इंदौर के न्यूरोलाजिस्ट डा. आलोक मांदलिया के अनुसार, जीबीएस दुर्लभ, लेकिन गंभीर तंत्रिका रोग है। इसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता खुद की नसों पर हमला करने लगती है। इस दौरान बनने वाली एंटीबाडी स्वस्थ मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे नर्व सिग्नल बाधित हो जाता है और मांसपेशियों में तेजी से कमजोरी बढ़ने लगती है।
फ्लू, डेंगू, कोविड, डायरिया और फूड प्वाइजनिंग इसके प्रमुख ट्रिगर हैं। इसके प्रमुख लक्षणों में पैरों में झनझनाहट और सुन्नपन, चलने में कमजोरी, हाथों की ताकत कम होना, बोलने और निगलने में परेशानी, गंभीर मामलों में सांस लेने में दिक्कत, दिल की धड़कन अनियमित होना और ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव शामिल हैं। यह तब गंभीर हो जाती है, जब यह गले और श्वास की मांसपेशियों पर हमला करती है। ऐसी स्थिति में मरीज कुछ भी निगल नहीं पाता। 80 से 90 प्रतिशत मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं।
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