हिमाचल में 132 करोड़ से बनेंगे 13 नए महिला छात्रावास। फाइल फोटो
जागरण संवाद केंद्र, शिमला। हिमाचल में कामकाजी महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए 132 करोड़ रुपये की लागत से 13 नए महिला छात्रावासों का निर्माण होगा। सोलन, पालमपुर, बद्दी, गगरेट, नागरोटा-बगवां सहित विभिन्न जिलों में इन्हें बनाया जाएगा।
इसका मुख्य उद्देश्य कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित और सस्ती आवास सुविधा प्रदान करना है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बताया कि राज्य के सभी 18,925 आंगनबाड़ी केंद्रों को ‘आंगनबाड़ी सह प्री-स्कूल’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को खेल-आधारित प्रारंभिक शिक्षा दी जाएगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि बच्चों की शिक्षा की नींव मजबूत हो सके।
मुख्यमंत्री ने सरकार की प्रमुख सुख आश्रय योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना अनाथ बच्चों और बेसहारा महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। इसके तहत राज्य सरकार उनकी परवरिश, शिक्षा और आजीविका की पूरी जिम्मेदारी उठाती है ताकि कोई भी बच्चा या महिला आत्मनिर्भर बनने की राह में पीछे न रहे।
बीते तीन वर्षों में राज्य का शिशु लिंग अनुपात 947 से बढ़कर 964 हो गया है। यह बदलाव बालिकाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए सरकार के निरंतर और गंभीर प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदिरा गांधी सुख सुरक्षा योजना के अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे बसर करने वाले परिवारों में जन्म लेने वाली बेटियों के लिए जन्म के समय 25,000 रुपये जमा किए जाते हैं।
इसके साथ ही माता-पिता दोनों का 2-2 लाख रुपये का जीवन बीमा भी किया जाता है, जिसकी राशि बेटी के 18 वर्ष पूरे होने पर या उसकी इच्छा अनुसार 27 वर्ष की आयु तक मिल सकती है। उन्होंने कहा कि इस योजना से ‘बेटी है अनमोल योजना अधिक सुदृढ़ हुई है। |
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