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5 साल से बैन, फिर भी लोगों को लहुलुहान कर रहा चाइनीज मांझा? नए साल में अब तक चपेट में आए 50 से ज्यादा राहगीर

deltin33 1 hour(s) ago views 292
  

प्रतीकात्मक तस्वीर



जागरण संवाददाता, हरिद्वार। पतंगबाजी के सीजन में चाइनीज मांझे ने सड़कों पर राहगीरों पर खतरा बढ़ाया हुआ है। पुलिस-प्रशासन की सख्ती के दावोंं के बीच पिछले साल एक बुलेट सवार की मौत और 150 से ज्यादा राहगीर घायल हुए। इस साल अभी तक 50 से ज्यादा लोग जख्मी हो चुके हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि पांच साल से प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझा शहर में पहुंच कैसे रहा है। पुलिस स्थानीय स्तर पर छापेमारी कर दुकानदारों की धरपकड़ तो करती है, लेकिन बड़ा सवाल जस का तस है। जब प्रतिबंध है तो यह मांझा बन कहां रहा है और इसकी तस्करी कैसे हो रही है। कुल मिलाकर आने वाली 23 जनवरी को वसंत पंचमी पर्व तक चाइनीज मांझे का खतरा चरम पर है। कार्रवाई के साथ-साथ सावधानी बरतकर इस खतरे से निपटा जा सकता है।

फ्लाइओवर पर सबसे ज्यादा खतरा

हरिद्वार में फ्लाइओवर का जाल बिछने से राहगीरों के चाइनीज मांझे से कटने की घटनाएं बढ़ी हैं। कारण यह है कि हरिद्वार, कनखल व ज्वालापुर में फ्लाइओवर के दोनों तरफ आबादी है। फ्लाइओवर से गुजरने के दौरान राहगीरों काफी ऊंचाई पर होते हैं।

आबादी में छतों से उड़ाई जा रही पतंग फ्लाइओवर के आस-पास तक पहुंचती है। जिससे अक्सर फ्लाइओवर से गुजरने के दौरान राहगीर की इसकी चपेट में आकर घायल हो जाते हैं। हादसों पर गौर करें तो चाइनीज मांझे से कटने की घटनाएं ज्वालापुर में ऊंचे पुल, सीतापुर फ्लाइओवर, सिंहद्वार फ्लाइओवर, प्रेमनगर आश्रम फ्लाइओवर, शंकराचार्य चौक फ्लाइओवर और भूपतवाला में फ्लाइओवर पर सबसे ज्यादा हुई हैं। इनके अलावा गली-मोहल्लों में मांझे से कटने की घटनाएं लगभग शून्य हैं।

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आखिर कहां बन रहा चाइनीज मांझा

सूत्रों और हालिया बरामदगी से यह आशंका मजबूत हुई है कि उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में चाइनीज मांझे जैसा ही खतरनाक मांझा स्थानीय स्तर पर तैयार किया जा रहा है। इसे नाम बदलकर, पैकिंग बदलकर और ‘नायलॉन व सिंथेटिक धागा’ बताकर सप्लाई किया जा रहा है, ताकि पकड़ में न आए। यही वजह है कि प्रतिबंध के दावों के बावजूद इसकी सप्लाई बनी हुई है।

ऐसे करें खतरनाक मांझे की पहचान

  • तेज धार: उंगली पर हल्का सा रगड़ते ही कट लगना।
  • चमकदार व धातु-सी परत: कांच पाउडर या केमिकल कोटिंग का संकेत।
  • असामान्य रंग: चटक हरा, नीला, सिल्वर या काला।
  • पानी से न गलना: लंबे समय तक मजबूत रहना।
  • पैकिंग संदिग्ध: बिना ब्रांड/पते के रोल, या \“इको-फ्रेंडली\“ जैसे भ्रामक शब्द।



प्रशासन कैसे लगाए प्रभावी रोक

  • सोर्स पर कार्रवाई: सीमावर्ती जिलों में कच्चे माल (नायलॉन धागा, कांच पाउडर, केमिकल) की सप्लाई ट्रैकिंग।
  • थोक निगरानी: थोक गोदामों, कूरियर और ई-मार्केटप्लेस की नियमित जांच।
  • फील्ड टेस्ट किट: मौके पर धार/कोटिंग जांचने की त्वरित किट।
  • कड़ी सजा: जब्ती के साथ लाइसेंस निरस्तीकरण और गैर-जमानती धाराओं में केस।
  • ड्रोन/सीसीटीवी: पतंगबाजी हॉटस्पॉट्स पर निगरानी।
  • जन-जागरूकता: स्कूल, आरडब्ल्यूए, बाजार समितियों में अभियान।



आमजन कैसे बचाएं अपनी जान

  • दोपहिया पर हेलमेट व नेक-कवर पहनें, खासकर दोपहर–शाम।
  • बच्चों को सुरक्षित मांझा (सूती धागा) ही दें, निगरानी रखें।
  • कट लगने पर तुरंत दबाव देकर खून रोकें, गहरे जख्म में अस्पताल जाएं।
  • संदिग्ध बिक्री दिखे तो पुलिस कंट्रोल रूम/स्थानीय थाने को सूचना दें।
  • विद्युत लाइनों/सड़कों के पास पतंग न उड़ाएं।


चाइनीज मांझे की बिक्री रोकने के लिए पुलिस पूरी तरह सतर्क है। छापेमारी के साथ ही सप्लाई चेन तोड़ने और आमजन को जागरुक करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही मांझा इस्तेमाल करने वालों पर भी मुकदमा दर्ज किया जाएगा।


                                                                                        प्रमेंद्र डोभाल एसएसपी हरिद्वार
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