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3200 करोड़ रुपये की ठगी के आरोपी लविश चौधरी को भारत लाएगी STF, रेड कॉर्नर नोटिस जारी

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एसटीएफ ने अब तक घोटोले में शामिल एसटीएफ ने 10 आरोपियों को हिरासत में लिया है।  



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने एक बड़े निवेश घोटाले के मुख्य आरोपी लविश चौधरी (उर्फ नवाब) के खिलाफ अब इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवा लिया है। यह धोखाधड़ी का मामला इतना बड़ा है कि इसमें कई राज्यों के निवेशकों से 3200 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का आरोप है।

इससे पहले एसटीएफ ने इंटरपोल की मदद से ब्लू कॉर्नर नोटिस के जरिए दुबई में लविश की मौजूदगी के ठोस सबूत जुटाए थे। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके नेटवर्क को तोड़ने के लिए प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। यह मध्य प्रदेश एसटीएफ के लिए पहला ऐसा मौका है, जब वह किसी फरार आरोपी को विदेश से वापस लाने की दिशा में कदम उठा रही है।

एसटीएफ ने इंदौर की स्पेशल कोर्ट में इस संबंध में अर्जी दाखिल की है। कोर्ट की मंजूरी मिलते ही सभी जरूरी दस्तावेज सीआईडी के रास्ते राज्य सरकार को भेजे जाएंगे, और फिर ये केंद्रीय गृह मंत्रालय व विदेश मंत्रालय के जरिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को सौंपे जाएंगे। अगर कोई कानूनी अड़चन नहीं आई तो आने वाले 3-4 महीनों में यूएई की अदालत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे सकती है।
ब्लू और रेड नोटिस में क्या फर्क है?

ब्लू नोटिस इंटरपोल का अलर्ट है। यह किसी व्यक्ति की लोकेशन, पहचान या गतिविधियों की जानकारी इकट्ठा करने के लिए जारी किया जाता है। वहीं रेड नोटिस सबसे सख्त कदम है।

इसके तहत आरोपी की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की मांग की जाती है। पकड़े जाने पर आरोपी को इंटरपोल की निगरानी में भारत (दिल्ली या मुंबई एयरपोर्ट) भेजा जा सकता है या एसटीएफ की टीम खुद दुबई जाकर उसे सुपुर्दगी ले सकती है।

एसटीएफ के एआईजी नवीन चौधरी के अनुसार, लविश के खिलाफ दर्ज एफआईआर और केस डायरी हिंदी में हैं, जबकि यूएई की अदालतें अरबी में सुनवाई करती हैं। इसलिए लगभग 200 दस्तावेजों का अरबी में अनुवाद कराया जा रहा है, साथ ही अंग्रेजी की प्रतियां भी तैयार की जा रही हैं।
जांच में 260 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति फ्रीज की जा चुकी

इस घोटाले में अब तक एसटीएफ ने 10 आरोपियों को हिरासत में लिया है। दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में छापेमारी की गई। गिरफ्तार लोगों में तीन डायरेक्टर स्तर के लोग भी शामिल हैं। जांच में 260 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति फ्रीज की जा चुकी है।

यह मामला निवेश के नाम पर एआई-बेस्ड फॉरेक्स ट्रेडिंग और एमएलएम स्कीम के जरिए लोगों को लुभाने का है, जहां उच्च रिटर्न का वादा करके ठगी की गई। एसटीएफ अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मुख्य साजिशकर्ता को भारत लाकर न्याय सुनिश्चित करने की कोशिश में जुटी है।

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