संवाद सहयोगी, गुरुग्राम। गुरुग्राम में सीवरेज सिस्टम की बिगड़ती हालत अब सिर्फ नगर निगम की समस्या नहीं रही। केंद्र और राज्य सरकार की सीधी निगरानी में आने के बाद अब नगर निगम गुरुग्राम को अपने सीवर नेटवर्क और माइक्रो एसटीपी की जमीनी सच्चाई सामने रखनी होगी। यमुना को प्रदूषण से बचाने के लिए चल रहे राष्ट्रीय स्तर के अभियान के तहत अब गुरुग्राम के ड्रेनेज सिस्टम और सीवेज डिस्चार्ज पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
हरियाणा शहरी स्थानीय निकाय विभाग की हालिया उच्चस्तरीय बैठक में निगम अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बरसाती नालों में गिर रहे सीवर पानी और माइक्रो एसटीपी की कार्यप्रणाली की पूरी रिपोर्ट तत्काल सौंपी जाए।
75 करोड़ के 41 माइक्रो एसटीपी सवालों के घेरे में
करीब पांच साल पहले नगर निगम ने शहर के विभिन्न पार्कों और रिहायशी इलाकों में 75 करोड़ रुपये खर्च कर 41 माइक्रो एसटीपी लगाए थे, ताकि गंदे पानी को साफ कर दोबारा बागवानी में इस्तेमाल किया जा सके। वर्तमान में स्थिति यह हैं कि आधे से अधिक प्लांट या तो बंद हैं या फिर तकनीकी खामियों के चलते काम नहीं कर रहे। मुख्यालय ने सभी एसटीपी का भौतिक सत्यापन और संचालन से जुड़ी रिपोर्ट तलब की है।
बरसाती नालों में सीवर छोड़ना बना बड़ी चिंता
बैठक में सबसे गंभीर मुद्दा यह उठा कि शहर में कई जगह सीवर लाइनों को सीधे बरसाती नालों से जोड़ दिया गया है। इससे न केवल जल प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि मानसून के दौरान बैकफ्लो और सड़क पर गंदा पानी भरने की समस्या भी पैदा होती है। गुरुग्राम, फरीदाबाद और मानेसर सहित छह नगर निगमों को ऐसे सभी अवैध कनेक्शन तुरंत काटने और सीवेज को मुख्य लाइनों में मोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
मंत्री की नाराजगी और केंद्रीय निगरानी
प्रदेश के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह पहले ही माइक्रो एसटीपी और सीवर प्रबंधन में लापरवाही पर नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सभी प्लांट्स का धरातल पर वेरिफिकेशन करने को कहा है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने साफ किया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय स्तर पर अपशिष्ट जल प्रबंधन की निगरानी हो रही है, इसलिए अब किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं होगी।
निगम ने शुरू किया शहरव्यापी सर्वे
सरकारी फटकार के बाद नगर निगम ने पूरे शहर में सर्वे शुरू कर दिया है। उन सभी स्थानों की जीपीएस मैपिंग की जा रही है जहां सीवर और ड्रेनेज आपस में जुड़े हुए हैं। जीएमडीए द्वारा सेक्टर-42 में पकड़े गए अवैध डिस्चार्ज को मॉडल बनाकर अन्य क्षेत्रों में भी जांच की जा रही है। उद्योगों को भी चेताया गया है कि एसटीपी बंद मिलने या ट्रीटेड पानी का दोबारा उपयोग न करने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। |
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