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बसपा मुखिया मायावती ने Samajwadi Party के कांशीराम जयंती के आयोजन को बताया राजनीतिक नाटकबाजी

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बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती



राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधान सभा चुनाव से पहले बसपा और सपा के बीच मतदाताओं में पैठ बनाने की जंग तेज हो रही है। कांशीराम जयंती पर सपा के प्रस्तावित पीडीए दिवस की तैयारी पर बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने गुरुवार को तीखा हमला बोला।

बसपा सुप्रीमो ने इसे समाजवादी पार्टी की राजनीतिक नाटकबाजी बताया और एक्स पर लिखा, ‘सपा का चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा से दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग, बसपा विरोधी और बहुजन समाज में जन्मे महापुरुषों के अपमान-तिरस्कार का रहा है, इस बारे में इनका पीडीए भी अच्छी तरह से जानता है।

बसपा के संस्थापक कांशीराम की जयंती पर सपा का पीडीए दिवस मनाना, उसकी विशुद्ध राजनीतिक नाटकबाजी के सिवाय कुछ भी नहीं है। सपा का इतिहास बहुजन समाज के संतों और महापुरुषों का सम्मान करने के बजाय उनका अपमान और तिरस्कार करने का रहा है, जिसे मीडिया और जनता अच्छी तरह जानती है। सपा अपनी पीडीए की रणनीति के तहत दलित मतदाताओं को रिझाने में जुटी है। सपा ने पिछले वर्ष 15 मार्च को कांशीराम जंयती को पीडीए दिवस के रूप में मनाया था, इस बार भी इसकी तैयारी है।  
मायावती ने याद दिलाया गेस्ट हाउस कांड

मायावती ने वर्ष 1993 के सपा-बसपा गठबंधन की विफलता और दो जून 1995 के स्टेट गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए इसे इतिहास की “काली क्रूरता“ बताया है। बसपा सुप्रीमो ने लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस कांड में खुद पर हुए जानलेवा हमले का उल्लेख करते हुए लिखा कि सपा का शोषण, अत्याचार का लंबा इतिहास है। उन्होंने कहा कि हमने कासगंज को कांशीराम नगर नाम से नया जिला बनाया, तो वर्तमान सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपनी सरकार बनते ही इसका नाम बदल दिया था।  
सपा सरकार ने बदल डाला नाम

बसपा ने कांशीराम के नाम से नई उर्दू-फारसी अरबी यूनिवर्सिटी लखनऊ में आइआइएम के पास बनाई, इसका भी नाम सपा सरकार ने बदल डाला और अब जिसे भाजपा सरकार ’लैंग्वेज यूनिवर्सिटी’ के रूप में प्रचारित करती है। कांशीराम की ख्वाहिश के मुताबिक बसपा सरकार ने जब भदोही में संत रविदास नगर नाम से नया जिला बनाया, तो उसे भी सपा सरकार ने जातिवादी रवैया अपनाते हुए बदल दिया था।  
सपा पर मुस्लिम विरोधी होने का भी आरोप

मायावती ने कहा कि सहारनपुर में भी कांशीराम के नाम पर बनाए गए सरकारी अस्पताल का नाम सपा सरकार ने बदल दिया। क्या यही सब है सपा का कांशीराम जी के प्रति आदर व सम्मान। मायावती ने सपा पर मुस्लिम विरोधी होने का भी आरोप लगाया। लिखा कि सपा का रवैया मुस्लिम विरोधी भी रहा है। कांग्रेस पार्टी की तरह ही सपा की सरकारों में भी सांप्रदायिक दंगों में भारी जान-माल की हानि के साथ लाखों परिवार प्रभावित हुए हैं। हकीकत में सपा के भड़काऊ आचरण आदि के कारण भाजपा को राजनीतिक रोटी सेंकने का मौका मिलता रहा।

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जातिवादी व सांप्रदायिक राजनीति

इस प्रकार सपा व भाजपा दोनों एक-दूसरे की जरूरत बनकर यहां जातिवादी व सांप्रदायिक राजनीति करते रहे, जिसका परिणाम है यूपी में भाजपा का राज और उससे पीड़ित मुस्लिम व बहुजन समाज। बसपा प्रमुख ने सवाल उठाया कि सपा, लोगों को इस बात का भी जवाब दे कि बहुजन नायक कांशीराम को उनके जीते-जी आदर-सम्मान देना तो बहुत दूर, बल्कि उनके देहांत के बाद एक दिन का भी राजकीय शोक घोषित करके उन्हें श्रद्धांजलि आदि क्यों नहीं अर्पित की गयी थी?

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सपा बहुजन समाज को जवाब दे। मायावती ने कांशीराम के नाम पर बने अन्य संस्थानों का नाम बदलने की भी बात कही। बसपा सुप्रीमो ने बहुजन समाज को सपा से सावधान रहने का आह्वान किया है।   
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