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गेमिंग की लत ने ली जान, 30000 रुपये के लिए दोस्त की हत्या; मुंबई में 20 साल के युवक का खौफनाक अपराध

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गेमिंग की लत ने ली जान 30000 रुपये के लिए दोस्त की हत्या (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मुंबई से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ऑनलाइन गेमिंग की लत ने एक युवक को हत्यारा बना दिया। सिर्फ 30 हजार रुपये के लिए एक दोस्त ने अपने ही दोस्त की जान ले ली। यह सनसनीखेज मामला करीब 6 महीने बाद पुलिस ने सुलझाया है।

मृतक राहुल कुमार योगेंद्र प्रसाद खारवर और आरोपी अंकित शाहू दोनों मुंबई के कुर्ला पश्चिम इलाके के रहने वाले थे और अच्छे दोस्त थे। राहुल एक निजी कंपनी में काम करता था और अंकित टेक्नोलॉजी और मोबाइल ऐप्स में ज्यादा समझदार था। इसी भरोसे के चलते राहुल ने अपने PF (प्रोविडेंट फंड) से पैसे निकालने में अंकित की मदद ली।
30 हजार रुपये की धोखाधड़ी

पुलिस के मुताबिक, अंकित ने राहुल के पीएफ खाते से 30 हजारनिकालकर अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कर लिए। इसके बाद उसने यह पूरी रकम ऑनलाइन गेमिंग में खर्च कर दी। जब राहुल को इस अनधिकृत निकासी की जानकारी मिली, तो उसने अंकित से पैसे वापस मांगे।

अंकित ने राहुल को एक यूपीआई ट्रांजैक्शन का स्क्रीनशॉट भेजा और दावा किया कि पैसे लौटा दिए गए हैं। लेकिन राहुल के खाते में कोई रकम जमा नहीं हुई थी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। इसके कुछ ही समय बाद राहुल लापता हो गया।
महीनों तक कोई सुराग नहीं

24 जुलाई 2025 को राहुल घर नहीं लौटा। परिजनों ने दोस्तों और रिश्तेदारों से पूछताछ की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद परिवार ने विनोबा भावे नगर पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

करीब छह महीने तक पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिला। हाल ही में राहुल के परिवार ने पुलिस को बताया कि अंकित पर शक हो सकता है। पुलिस को यह भी पता चला कि अंकित की मां और राहुल एक ही कंपनी में काम करते थे।
नदी किनारे ले जाकर की हत्या

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि 24 जुलाई की शाम करीब 8 बजे अंकित राहुल को मिठी नदी के किनारे, एयरपोर्ट की दीवार के पास ले गया। जब राहुल वहां हवाई जहाज देख रहा था, तभी अंकित ने उसे नदी में धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
गेमिंग की लत बना कारण

पुलिस के अनुसार, अंकित ऑनलाइन गेमिंग का आदी था और उसने पीएफ के पैसे इसी लत में गंवा दिए। पैसे लौटाने में असमर्थ होने और पकड़े जाने के डर से उसने यह खौफनाक कदम उठाया।

पुलिस के पास बैंक लेनदेन रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स और मोबाइल टावर लोकेशन जैसे पुख्ता सबूत हैं, जो घटना के समय दोनों की मौजूदगी मौके पर साबित करते हैं। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 103 (हत्या), 238 (सबूत मिटाना), 316 (आपराधिक विश्वासघात) और आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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