अखिलेश तिवारी, कानपुर। आइआइटी कानपुर के बीटेक छात्र अब अपनी इच्छा के अनुसार रोबोटिक्स से लेकर राकेट्री तक विभिन्न तकनीकों के प्रयोग और नवाचार कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें पाठ्यक्रम और लैब टाइमिंग की बाध्यता भी नहीं रहेगी।
छात्रों की अब अपनी प्रयोगशाला यानी मेकर्स - स्पेस है जहां विभिन्न क्षेत्रों के छात्र एक छत के नीचे काम कर सकेंगे। चाहे वह फार्मूला वाहन बनाना हो या मशीन लर्निंग के माडल तैयार करना।
मेकर्स- स्पेस में उन्हें मनचाहे प्रोजेक्ट पर काम करने की छूट है। मेकर्स - स्पेस की स्थापना आइआइटी के 1991 बैच के पूर्व छात्रों के सहयोग से की गई है।
आइआइटी कानपुर में छात्र नवाचार के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत मेकर्स- स्पेस के साथ की है। संस्थान के साइंस एंड टेक्नोलाजी काउंसिल ने आधिकारिक तौर पर इसका शुभारंभ किया है। प्रोफेसर- इंचार्ज मेकर्स- स्पेस प्रो. अमिताभ बंद्योपाध्याय ने बताया यह एक ऐसी अत्याधुनिक सुविधा है जिसका सपना वर्षों पहले देखा गया था।
1991 के पूर्व छात्र बैच के सहयोग से यह सपना साकार हो सका है। यहां छात्रों को अपने निर्धारित पाठ्यक्रम से हटकर विभिन्न इंजीनियरिंग व तकनीक के प्रयोग करने का मौका मिल सकेगा। विभिन्न विभागों में स्थित लैब में सुबह नौ बजे से पांच बजे तक ही प्रैक्टिकल किए जा सकते हैं।
जबकि यह छात्रों का अपना कार्य स्थल है जहां वह किसी भी समय आकर काम कर सकते हैं। इसमें विभिन्न उत्पादों की बढ़ती निर्माण लागत को कम करने की दिशा में छात्र अपने नवाचार कर सकेंगे। खास बात है कि इस सेंटर में सभी इंजीनियरिंग विभाग के स्नातक छात्र इकट्ठा होकर काम करेंगे।
इस योजना को मूर्त रूप देने में डीन (संसाधन एवं पूर्व छात्र), डीन (छात्र मामले), आइआइटी कानपुर डेवलपमेंट फाउंडेशन, और संस्थान कार्य विभाग का भी योगदान है। इस सुविधा के मिलने से अब आइआइटी कानपुर की छात्र टीमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में और अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगी।
यह केंद्र छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए कुशल बनाएगा। डीन (संसाधन एवं पूर्व छात्र) प्रो. अमेय करकरे ने बताया कि 1991 बैच के छात्रों ने 2.5 करोड़ रुपये मेकर्स - स्पेस के लिए देने की घोषणा की है।
रोबोटिक्स से लेकर राकेट्री तक
यह एक ऐसा हब है जहां विभिन्न क्षेत्रों के छात्र एक छत के नीचे काम कर सकेंगे। चाहे वह फार्मूला वाहन बनाना हो या मशीन लर्निंग के माडल तैयार करना। यहां सब कुछ सीखा और बनाया जा सकता है। इसके लिए यहां विभिन्न विभागों की लैब से संबंधित मशीनों को भी स्थापित किया गया है।
इलेक्ट्रानिक्स वर्कस्टेशन और प्रोटोटाइप बनाने के आधुनिक उपकरण जिनसे यह सुविधा रोबोटिक्स, राकेट्री, फार्मूला व्हीकल, फाइनेंस, मशीन लर्निंग और वेब डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों के लिए अत्यंत उपयोगी बन गई है।
\“मेकर्स- स्पेस खुलेपन, सुलभता और अंतर-विषयक समस्या समाधान की दिशा में एक बड़ा सांस्कृतिक बदलाव है। यह एक ऐसा हैंड्स आन ट्रेनिंग सेंटर बनेगा जहां विचारों को प्रभाव में बदला जाएगा। यहां छात्रों को बनाने- बिगाड़ने और संवारकर सीखने का मौका मिलेगा। \“
= प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल, निदेशक आइआइटी कानपुर |
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