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लातेहार-चतरा के रिश्तों को रूला गया एयर एंबुलेंस हादसा, डॉक्टर और पायलट के जिलों से गहरे पारिवारिक संबंध

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उत्कर्ष पाण्डेय, लातेहार। बीती शाम को चतरा व लातेहार जिले की सीमा से सटे जंगल में एयर एंबुलेंस क्रैश से चतरा व लातेहार जिले के बीच कई रिश्ते बिखर गए। जब विमान हादसे की खबर आई, तो पहले यह एक सामान्य दुर्घटना लगी। लेकिन जैसे-जैसे नाम सामने आते गए, यह स्पष्ट होता गया कि इस हादसे की जड़ें दोनों जिलों के दिल में गहरी धंसी हुई हैं।

यह संयोग नहीं, बल्कि एक ऐसा दुखद संगम है, जहां हर कड़ी लातेहार और चतरा को जोड़ती है। मरीज लातेहार का, पत्नी का मायका चतरा में। डाक्टर का सेवा-संबंध लातेहार से। पायलट का घर लातेहार में, पिता की तैनाती चतरा में। हादसे की जमीन सीमा पर और मित्र दोनों जिलों में फैले। इसीलिए यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि दो जिलों के साझा दर्द की दास्तान बन गया है।

हर नाम के साथ एक रिश्ता जुड़ा है और हर रिश्ते के साथ एक आंसू। लातेहार और चतरा की गलियों में आज सन्नाटा है। लोग एक-दूसरे को फोन कर हाल पूछ रहे हैं, पुराने संदेश पढ़ रहे हैं, और यकीन नहीं कर पा रहे कि जिनसे कल तक बात हुई, वे आज सिर्फ याद बन गए।
लातेहार की ससुराल व चतरा के मायके दोनों घरों में एक साथ मातम

मरीज संजय जिसे बेहतर इलाज की उम्मीद में आसमान के रास्ते दिल्ली ले जाया जा रहा था। वह लातेहार जिले के चंदवा का निवासी था। परिवार ने उम्मीदों के सहारे उसे एयर एंबुलेंस पर बैठाया था। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। दर्द की परत यहीं खत्म नहीं होती मृतक की पत्नी का मायका चतरा में है। यानी एक ही हादसे ने लातेहार के ससुराल और चतरा के मायके दोनों घरों के आंगन में एक साथ मातम बिछा दिया।

हादसे का स्थल भी जैसे इसे लातेहार कनेक्शन की कहानी कहता है। विमान चतरा जिले के उस इलाके में गिरा जो लातेहार की सीमा से सटा हुआ है। सीमा भले प्रशासनिक हो, लेकिन सामाजिक रिश्तों की कोई सरहद नहीं होती। यही वजह है कि हादसे की खबर ने दोनों जिलों को एक साथ झकझोर दिया।
दिवंगत चिकित्सक डा. विकास का था लातेहार से गहरा जुड़ाव

विमान में सवार चिकित्सक, डा. विकास कुमार, सिर्फ एक चिकित्सक नहीं थे। उनका लातेहार से गहरा जुड़ाव रहा। उन्होंने यहां के कई स्वास्थ्य केंद्रों में सेवा दी थी। मरीजों के बीच उनकी छवि एक मृदुभाषी, समर्पित और संवेदनशील चिकित्सक की थी।

कई लोगों की आंखों में आज भी वह मुस्कान तैर रही है, जिसके साथ वे मरीजों का हाल पूछते थे। रांची सदर अस्पताल से लेकर अन्य जगहों तक अपनी सेवा देने वाले डॉ. विकास का यूं चले जाना स्वास्थ्य जगत के लिए व्यक्तिगत क्षति है। कई जगहों पर लोगों ने शोकसभा में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
अधिकारियों की टीम पुराने दिनों को याद कर हुई भावुक

इस हादसे ने कई प्रशासनिक और सामाजिक हस्तियों को भी भीतर तक तोड़ दिया है। चतरा के अपर समाहर्ता अरविंद कुमार, बोकारो के अपर समाहर्ता मुमताज अंसारी, सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट रविशंकर सिंह, बार एसोसिएशन लातेहार के जिलाध्यक्ष लाल अरविंद नाथ शाहदेव व बैडमिंटन खिलाड़ी सौरभ कुमार सभी ने दैनिक जागरण से बात कर कहा कि वे अपने एक अच्छे जिंदादिल मित्र को खो दिए हैं।

वे चंदवा प्रखंड में साथ बिताए पुराने दिनों को याद कर भावुक हैं। किसी ने साथ की बैठक को याद किया, किसी ने साथ में बैडमिंटन खेलने के दिन, तो किसी ने साथ में घूमने जाने वाले पल। यह हादसा उनके लिए सिर्फ एक सूचना नहीं निजी शोक है।
आसमान को अपनी राह बनाने वाला बेटा खामोश लौटा

हादसे में जान गंवाने वाले दिवंगत कैप्टन विवेक विकास भगत का घर लातेहार जिले के डीही मुरूप के समीप कुंदरी गांव में है। पिता चतरा जिले में पदस्थापित हैं। यानी बेटा लातेहार की मिट्टी का, पिता चतरा की जिम्मेदारी में और हादसा दोनों के बीच की सरहद पर। गांव में मातम पसरा है। लोगों को अब भी यकीन नहीं हो रहा कि आसमान को अपनी राह बनाने वाला बेटा इस तरह खामोश लौटेगा।
एयर एंबुलेंस क्रैश ने तोड़ दिए रिश्तों के कई पुल

इस एयर एंबुलेंस क्रैश ने आसमान से गिरकर जमीन पर सिर्फ मलबा नहीं छोड़ा इसने रिश्तों के कई पुल तोड़ दिए। अब दोनों जिलों में एक ही सवाल गूंज रहा है क्या इतना गहरा जुड़ाव कभी इस तरह टूट सकता था। यह हादसा इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा, लेकिन लातेहार और चतरा के लोगों के दिलों में यह एक ऐसी टीस बनकर रहेगा, जो लंबे समय तक याद दिलाती रहेगी कि कभी-कभी एक घटना कितनी जिंदगियों को एक साथ बदल देती है।   
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