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जागरण संवाददाता, पटना। ईमेल के जरिए सिविल कोर्ट में बम रखे जाने का संदेश भेजने वाले आरोपितों की तलाश में जुटी पटना पुलिस तकनीकी अनुसंधान के बाद राजस्थान के जैसलमेर और उसके आसपास के जिलों में गई थी।
कुछ लोगों से पूछताछ भी की गई, फिर टीम चेन्नई पहुंच गई। बावजूद पटना पुलिस धमकी भरा ईमेल भेजने वाले को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। पुलिस टीम खाली हाथ पटना लौट आई है।
नौ से 12 फरवरी के बीच तीन बार व्यवहार न्यायालय परिसर में बम रखे जाने का ईमेल भेजा गया था। इसके भी पूर्व धमकी भरा ईमेल प्राप्त होने के मामले में पीरबहोर थाने में वर्ष 2025 में 25 अप्रैल, 29 अगस्त और 16 अक्टूबर में प्राथमिकी की गई थी।
इनमें से किसी एक मामले में भी पुलिस आरोपित की पहचान तक नहीं कर सकी है। पुलिस और जांच एजेंसी की जांच ईमेल की उत्पत्ति, आइपी एड्रेस और इस्तेमाल किए गए डिजिटल माध्यमों की जांच में ही उलझी है। नौ से 12 फरवरी के बीच लगातार तीन बार धमकी भरा ईमेल आने के बाद जांच के लिए विशेष टीम का गठन किया गया।
साथ ही एटीएस और साइबर सेल की टीम भी जांच में जुटी है। थाने से दो दारोगा रैंक के पदाधिकारी को भी टीम में शामिल किया गया। सूत्रों की मानें तो तकनीकी अनुसंधान में पुलिस को कुछ अहम जानकारी हासिल हुई। उसके जरिए चेन्नई और राजस्थान के जैसलमेर में लोकेशन मिला था।
इसके आधार पर पटना पुलिस की विशेष टीम पहले राजस्थान के जैसलमेर पहुंची थी। वहां पर तीन दिनों तक छाबनीन की गई, लेकिन कुछ खास सफलता हाथ नहीं लगी।
इसके बाद पुलिस चेन्नई पहुंची। वहां भी दो दिनों तक रही। वहां कुछ लोगों से पूछताछ की गई, लेकिन कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला। इसके बाद पुलिस टीम लौट आई।  |
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