डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में सड़क यात्रा को पहले से अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और सुविधाजनक बनाने की दिशा में लोक निर्माण विभाग (PWD) एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। विभाग ने अत्याधुनिक ‘लोकपथ एप-2’ तैयार किया है, जिसे गूगल मैप्स से भी अधिक उपयोगी और सुरक्षा-केंद्रित बताया जा रहा है। इस एप का औपचारिक लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को लोक निर्माण विभाग के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में करेंगे।
तकनीक और सुरक्षा का नया मॉडल
गुजरात के भास्कराचार्य संस्थान के सहयोग से विकसित यह एप देश में किसी भी राज्य सरकार की ओर से किया गया अपनी तरह का पहला प्रयोग माना जा रहा है। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की पहल पर तैयार इस एप का उद्देश्य केवल मार्गदर्शन देना ही नहीं, बल्कि सड़कों की गुणवत्ता और यात्री सुरक्षा को नई ऊंचाई पर ले जाना है। लोकपथ एप-2 में प्रदेश के सभी नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और प्रमुख जिला मार्गों का विस्तृत और अपडेटेड डाटा उपलब्ध होगा।
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ब्लैक स्पॉट पर मिलेगा एडवांस अलर्ट
लोकपथ एप-2 की सबसे खास और अनोखी सुविधा इसका सेफ्टी अलर्ट सिस्टम है। प्रदेश के 142 हाईवे पर चिन्हित किए गए 450 से अधिक दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट को इसमें मैप किया गया है। यात्रा के दौरान जैसे ही वाहन किसी ब्लैक स्पॉट से एक किलोमीटर पहले पहुंचेगा, एप ऑडियो अलर्ट देकर चालक को गति नियंत्रित करने की चेतावनी देगा। 200 मीटर की दूरी पर यह चेतावनी दोबारा मिलेगी—यह सुविधा फिलहाल गूगल मैप्स में भी उपलब्ध नहीं है।
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यात्रियों के लिए ऑल-इन-वन गाइड
यह एप केवल नेविगेशन टूल नहीं, बल्कि यात्रियों के लिए एक संपूर्ण डिजिटल गाइड होगा। इसमें धार्मिक और पर्यटन स्थलों के साथ-साथ नजदीकी अस्पताल, थाना, होटल, टोल प्लाजा और टोल दरों की जानकारी भी मिलेगी। आपात स्थिति में यूजर एप के माध्यम से सीधे एंबुलेंस या 911 पर कॉल कर सकेंगे। दुर्घटना की स्थिति में एप यह भी बताएगा कि सबसे नजदीकी अस्पताल कौन सा है और वहां पहुंचने का सबसे तेज रास्ता क्या है।
आमजन की भागीदारी, इंजीनियरों की जवाबदेही
लोकपथ एप-2 के जरिए आम नागरिक भी सड़क और पुलों की गुणवत्ता पर नजर रख सकेंगे। कहीं गड्ढा, दरार या निर्माण में खामी दिखने पर मौके से फोटो खींचकर सीधे एप पर अपलोड की जा सकेगी। शिकायत के समाधान के लिए संबंधित इंजीनियरों की समयसीमा तय की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
इंजीनियरों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
शनिवार को होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम में प्रदेशभर के 1,500 से अधिक इंजीनियर हिस्सा लेंगे। इस दौरान ‘कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क’ दस्तावेज और बीते दो वर्षों के नवाचारों पर आधारित पुस्तिका का विमोचन भी किया जाएगा। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में इंजीनियरों को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे बड़े सड़क और बाईपास प्रोजेक्ट्स की तकनीकी और वित्तीय निगरानी को और प्रभावी बनाया जा सके। |