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मीरवाइज उमर फारूक फिर नजरबंद। फोटो एक्स
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। मीरवाइज उमर फारूक शुक्रवार को एक बार फिर कथित तौर पर अपने घर में नजरबंद रहे। लगातार दूसरे शुक्रवार को वह जामिया मस्जिद में नमाज ए जुम्मा अदा नहीं कर पाए।
उन्होंने अपनी नजरबंदी की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने आज कश्मीर में सूखे से राहत के लिए बारिश और बर्फ की दुआ करने के लिए विशेष नमाज का एलान किया था,लेकिन यहां सरकार इसकी भी इजाजत नहीं देती।
मीरवाइज मौलवी उमर फारूक कश्मीर में प्रमुख इस्लामिक धर्मगुरूओं में एक हैं। वह जम्मू कश्मीर में विभिन्न इस्लामिक संगठनों के साझा मंच मुत्तहिदा मजलिस ए उलेमा के अध्यक्ष और कश्मीर की सबसे पुरानी व ऐतिहासिक जामिया मस्जिद के मुख्य इमाम भी हैं।
हुर्रियत कान्फ्रेंस से कथित तौर पर अलग हो चुके मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने कहा अपनी नजरबंदी की जानकारी इंटरनेट मीडिया पर अपने अधिकारिक एक्स हैंडल पर साझा करते हुए लिखा-एक और शुक्रवार और एक बार फिर अधिकारियों ने मुझे जामा मस्जिद जाने की इजाज़त नहीं दी।
यह बहुत दुख की बात है कि मैं इस बहुत ज़्यादा सूखी सर्दी में बारिश और बर्फ़ के लिए लोगों को मिलकर दुआ नहीं कर सका। हमारी दुआएं हमारी ताकत हैं, अल्लाह उन्हें कबूल करे।
एक अन्य बयान में मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने कहा कि मुझे समझ में नहीं आता कि यहां सरकार क्या चाहती है? मैं तो जामिया मस्जिद में नमाज ए जुम्मा के लिए भी नहीं जा सकता।
बिना किसी कारण मुझे घर में नजरबंद कर दिया जाता है। मैने लोगों से आग्रह किया था कि आज नमाज ए जुम्मा के अवसर पर सभी मिलकर कश्मीर में सूखी सर्दी से राहत के लिए बारिश और हिमपात के लिए विशेष दुआ करेंगे। यहां प्रशासन को यह भी मंजूर नहीं है।
उन्होंने कहा कि कश्मीर में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर में बेशक शांति और सामान्य स्थिति का दावा किया जा रहा है, लेकिन सच यह है कि वर्ष 2019 में जम्मू कश्मीर में किए गए इकतरफ संवैधानिक बदलाव के बाद भी कश्मीर में हालात सही नहीं हुए हैं। लोगों में डर और असुरक्षा और विमुखता की भावना है। |
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