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एम्स पटना में कैश काउंटर से शेयर बाजार तक: 42.98 लाख गबन ने खोली वित्तीय निगरानी की पोल, निलंबित मुख्य कैशियर अनुराग अमन गिरफ्तार

cy520520 2026-1-9 10:26:56 views 703
  

एम्स पटना



जागरण संवाददाता, फुलवारी शरीफ(पटना)। देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शुमार अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना में सामने आए 42.98 लाख रुपये के गबन के मामले ने न सिर्फ प्रशासन को झकझोर दिया है, बल्कि संस्थान की आंतरिक वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस प्रकरण में एम्स के चीफ कैशियर अनुराग अमन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि संस्थान प्रशासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी है।

एम्स पटना में अस्पताल के वित्तीय लेनदेन से जुड़ी एक बड़ी अनियमितता का मामला सामने आया है। इस संबंध में बुधवार को एम्स पटना प्रशासन की ओर से फुलवारी शरीफ थाना में एक लिखित आवेदन दिया गया, जिसमें अस्पताल की नगद राशि में भारी गड़बड़ी का खुलासा किया गया है।

आवेदन में बताया गया है कि 5 जनवरी 2026 को एम्स पटना के वित्त एवं लेखा अधिकारी की रिपोर्ट के माध्यम से यह जानकारी सामने आई कि अस्पताल सूचना प्रणाली के अंतर्गत 1 अप्रैल 2025 से 31 दिसंबर 2025 की अवधि के दौरान अस्पताल द्वारा प्राप्त नगद राशि और बैंक में जमा की गई राशि के मिलान में 42.98 लाख रुपये की नगद कमी पाई गई है।

इससे पहले, वित्तीय अनियमितता की आशंका को देखते हुए 4 जनवरी 2026 को एम्स पटना के वित्त एवं लेखा विभाग के अधिकारियों की एक टीम ने सुरक्षा कर्मियों की उपस्थिति में कैश वॉल्ट का आकस्मिक भौतिक सत्यापन किया था। इस दौरान मुख्य कैशियर अनुराग अमन, जो कैश वॉल्ट के संरक्षक थे और अस्पताल की नगद राशि बैंक में जमा कराने के लिए जिम्मेदार थे, स्वयं मौजूद थे।

आकस्मिक सत्यापन के दौरान कैश वॉल्ट में मात्र 1 लाख 51 हजार 280 रुपये नगद पाए गए, जबकि 42 लाख 98 हजार 720 रुपये की नगद कमी स्पष्ट रूप से सामने आई। सत्यापन के समय मुख्य कैशियर अनुराग अमन ने स्वीकार किया कि उन्होंने कैश वॉल्ट से करीब 42 लाख 99 हजार रुपये की राशि निकाली थी।

इसके बाद 5 जनवरी 2026 को अनुराग अमन ने अपने लिखित बयान में यह भी स्वीकार किया कि उक्त राशि उन्होंने विभिन्न तिथियों में अपनी पत्नी के बैंक ऑफ इंडिया खाते संख्या 579310510000994 में जमा की थी। उसी दिन संध्या में उन्होंने प्रशासन को 42 लाख 99 हजार रुपये की नगद कमी की जानकारी भी दी।

प्रशासनिक दबाव के बाद अनुराग अमन ने कुल 42 लाख 95 हजार रुपये की राशि तीन किस्तों में एम्स पटना के खाते में वापस जमा कराई। बावजूद इसके, मामले की गंभीरता को देखते हुए एम्स पटना प्रशासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

गुरुवार को निलंबित मुख्य कैशियर अनुराग अमन को फुलवारी शरीफ थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर थाना लाया। पुलिस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई है।

एम्स पटना द्वारा जारी आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया है कि संस्थान के एक कर्मचारी को वित्तीय दुरुपयोग से संबंधित प्रथम दृष्टया निष्कर्षों के आधार पर निलंबित किया गया है। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि राशि की वापसी का अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। एम्स प्रशासन ने दो टूक कहा है कि वित्तीय कदाचार के प्रति संस्थान की नीति शून्य सहिष्णुता की है और जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, संस्थान ने अपने सभी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
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