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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश के नागरिकों स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना लगातार चुनौती बनता जा रहा है। स्थिति यह है कि आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद में कई विकास खंड भूजल के अति दोहन के शिकार हो गए हैं। इन जिलों में जरूरत से अधिक जमीन से पानी निकाला जा रहा है।
भूजल से निर्भरता खत्म करने के लिए इन जिलों को भविष्य पानी मुहैया कराने के लिए नदियों से पाइप के माध्यम से पानी पहुंचाने की योजना पर कार्य हो रहा है। आगरा में भूजल का 116 प्रतिशत दोहन हो रहा है। इसके चलते यहां के 15 ब्लाक में से नौ अति दोहन की श्रेणी में हैं।
दो ब्लाक गंभीर और चार अर्द्ध गंभीर की श्रेणी में हैं। मथुरा में कुल 10 ब्लाक हैं। इनमें से एक अति दोहन और दो गंभीर की श्रेणी में है। स्थिति यह है कि कई अन्य ब्लाक में स्थितियां खराब होने की कगार पर हैं।
फिरोजाबाद में भी 112 प्रतिशत भूजल निकाला जा रहा है। यहां के सभी नौ ब्लाक भूजल के अति दोहन के शिकार हैं। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि पांच ब्लाक में भूजल का अति दोहन हो गया है। एक ब्लाक गंभीर और दो अर्द्ध गंभीर श्रेणी में है।
एक सर्वे में सामने आया है कि वहां वर्ष 2012 से 2021 तक भूजल के स्तर में नौ से 10 मीटर की गिरावट दर्ज की गई है। जल जीवन मिशन के तहत इन जिलों को पाइप से पीने का पानी पहुंचाने की कई योजनाएं शुरू की गई हैं।
आगरा और फिरोजाबाद को एटा में लोवर गंगा कैनाल से पानी लेकर जल शोधन संयंत्र (डब्लूटीपी) से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की योजना पर कार्य चल रहा है।
वहीं, मथुरा को स्वच्छ जल पहुंचाने के लिए बुलंदशहर में अपर गंगा कैनाल से पानी लेकर डब्लूटीपी के माध्यम से पानी पहुंचाया जाएगा। इसके लिए डब्लूटीपी का निर्माण किया जा रहा है।
जल जीवन मिशन से मिली जानकारी के अनुसार, फिरोजाबाद में सतही जल स्रोत आधारित पेयजल योजना से नौ ब्लाक के 780 गांवों और आगरा के 15 ब्लाक के 902 गांवों शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का कार्य चल रहा है। एटा में प्रदेश के सबसे बड़े डब्लूटीपी का निर्माण शुरू करने की तैयारी है। |
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