हिमाचल प्रदेश में दो लाख फर्जी राशन कार्ड धारक पकड़े गए हैं। प्रतीकात्मक फोटो
जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को पारदर्शी बनाने के लिए चलाए जा रहे सत्यापन अभियान का असर सामने आने लगा है। प्रदेश में राशनकार्ड उपभोक्ताओं की संख्या करीब 72 लाख से घटकर 70 लाख रह गई है। प्रदेश में दो लाख फर्जी राशन कार्ड धारक थे।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की ओर से की गई गहन समीक्षा में बड़ी संख्या में अपात्र कार्ड चिह्नित किए गए, जिन्हें रद कर दिया है।
फर्जी कार्ड थे जारी
विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह गिरावट डाटा शुद्धिकरण और पात्रता की पुनः जांच का परिणाम है। लंबे समय से विभाग को शिकायतें मिल रही थीं कि कई ऐसे उपभोक्ता भी सस्ता राशन ले रहे हैं जो आय मानदंडों के दायरे में नहीं आते या जिनके नाम पर डुप्लीकेट कार्ड जारी थे। इसके मद्देनजर प्रदेशभर में डिजिटल सत्यापन, आधार सीडिंग, परिवार विवरण मिलान और भौतिक जांच का विशेष अभियान चलाया गया।
क्या कहते हैं विभाग के निदेशक
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशक आइएएस राम कुमार गौतम ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जरूरतमंद परिवारों तक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, राशनकार्ड डाटा की व्यापक समीक्षा के दौरान डुप्लीकेट, अपात्र और आय मानदंडों से बाहर पाए गए लाभार्थियों को सूची से हटाया गया है। यह प्रक्रिया पारदर्शिता बढ़ाने और पीडीएस को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक थी।
दोबारा सत्यापन का भी मौका
उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र परिवार का हक नहीं छीना जाएगा और लाभार्थियों को ही योजनाओं का पूरा लाभ मिलेगा। विभाग ने जिलों को निर्देश दिए हैं कि जिन उपभोक्ताओं को तकनीकी कारणों या दस्तावेज की कमी से सूची से बाहर किया गया है, उन्हें दोबारा सत्यापन का अवसर दिया जाए।
मृत लोगों के नाम पर भी थे राशन कार्ड
आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों, मृत व्यक्तियों के नाम पर जारी व एक ही परिवार के कई कार्ड होने पर इन्हें रद किया गया है। शिमला समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में फील्ड स्तर पर निरीक्षण तेज कर दिया है। उचित मूल्य की दुकानों के रिकार्ड, परिवार रजिस्टर व डिजिटल पोर्टल के आंकड़ों का मिलान कर सूची को अपडेट किया जा रहा है।
नियमित अंतराल में होगा सत्यापन
विभाग ने यह भी संकेत दिए हैं कि भविष्य में नियमित अंतराल में सत्यापन किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस सख्ती से पीडीएस व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और भरोसा बढ़ेगा। \“सही लाभार्थी तक सही राशन\“ की नीति के अंतर्गत प्रदेश में खाद्य सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने में यह कदम बड़ा प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है।
यह भी पढ़ें: हिमाचल प्रदेश सरकार ने खर्चों में कटौती की शुरू, कैसे जुटाएंगे 3000 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व? 7 प्वाइंट में समझें
यह भी पढ़ें: UP के पूर्व सीएम अखिलेश यादव पहुंचे हिमाचल प्रदेश के बद्रीका आश्रम, परिवार एक सप्ताह से यहीं
 |
|