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हरियाणा के विश्वविद्यालयों में कई साल से प्रोफेसरों की भर्तियां नहीं, 60 प्रतिशत पद खाली; कैसे निकलेगा समाधान?

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रोहतक विश्वविद्यालय फाइल फोटो



अनुराग अग्रवाल, पंचकूला।  हरियाणा के सरकारी विश्वविद्यालयों में लंबे समय से शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। शैक्षणिक कर्मचारियों में किसी विश्वविद्यालय में छह साल से तो किसी विश्वविद्यालय में आठ साल से प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती नहीं हुई है।

शिक्षकों की भर्ती के अभाव में जहां पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, वहीं पहले से कार्यरत शिक्षकों पर काम का बोझ बढ़ गया है। विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी का सबसे विपरीत असर रिसर्च वर्क (पीएचडी) पर पड़ रहा है।

विद्यार्थियों को जहां प्राइवेट विश्वविद्यालयों का रुख कर महंगी शिक्षा प्राप्त करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, वहीं पीएचडी करने के लिए भी अधिक धन खर्च करना उनकी मजबूरी हो गया है।
हरियाणा में दस स्टेट यूनिवर्सिटी

हरियाणा में 10 स्टेट यूनिवर्सिटी, 25 प्राइवेट यूनिवर्सिटी, तीन डीम्ड यूनिवर्सिटी और एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है। सरकारी विश्वविद्यालयों में कई साल से शिक्षकों की भर्ती नहीं होने का मुद्दा कुलगुरुओं और कुलसचिवों की राज्यपाल द्वारा ली गई बैठक में भी उठ चुका है।

प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा के सामने भी शिक्षक संगठन, कुलगुरु और कुलसचिव शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा उठा चुके हैं, लेकिन अभी तक इन विश्वविद्यालयों में खाली पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चालू नहीं की गई है। काम चलाने के लिए कुछ अनुबंधित शिक्षकों की नियुक्तियां की गई हैं, लेकिन उनसे भी काम नहीं चल रहा है।
सबसे खराब स्थिति एमडीयू में

शिक्षकों की कमी को लेकर सबसे खराब स्थिति महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) रोहतक की है। यहां प्रोफेसर के स्वीकृत 25 पदों के विपरीत सिर्फ दो ही प्रोफेसर काम कर रहे हैं, जबकि 23 पद खाली हैं। एसोसिएट प्रोफेसरों के स्वीकृत 41 पदों के विपरीत 12 पर नियुक्तियां हो रखी हैं और 29 पद खाली चल रहे हैं।

असिस्टेंट प्रोफेसर के स्वीकृत 319 पदों में से 168 पद ही भरे हुए हैं, जबकि 151 पद खाली चल रहे हैं। इस तरह प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसरों के स्वीकृत 385 पदों के विपरीत मात्र 182 शिक्षकों की ही नियुक्तियां हो पाई हैं, जबकि 203 पद आज भी खाली चल रहे हैं।
103 पदों पर हो रही भर्तियां

एमडीयू रोहतक में ही सेल्फ फाइनेंस श्रेणी के प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसरों के स्वीकृत 234 पदों में से 103 पर ही भर्तियां हो पाई हैं, जबकि 131 पद अभी खाली चल रहे हैं।

गैर शैक्षणिक श्रेणी के 1748 स्वीकृत पदों में से 645 पद भरे हुए हैं और 1103 पद खाली हैं, जबकि सेल्फ फाइनेंस श्रेणी के स्वीकृत 113 पदों में से 84 पद भरे हुए हैं और 29 पद खाली हैं। उच्च शिक्षा में प्रोफेसर का पद बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, जबकि सभी विश्वविद्यालयों में इस पद पर नियुक्तियों का अभाव बना हुआ है।

चौधरी बंसीलाल यूनिवर्सिटी भिवानी में प्रोफेसरों के 15 में से 13 व कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय में 34 में से 32 पद खाली है। एसोसिएट प्रोफेसरों के कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय में 72 में से 61, चौधरी बंसीलाल यूनिवर्सिटी भिवानी में 28 में 26 पद खाली चल रहे हैं।
अनुबंध आधारित व वैकल्पिक साधनों से काम चलाऊ व्यवस्था

राज्य के विश्वविद्यालयों में जहां तक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसरों के कुल पदों की भर्ती का सवाल है, चौधरी बंसीलाल यूनिवर्सिटी भिवानी में कुल स्वीकृत 108 पदों में से 75 और कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय में 501 में से 249 पद खाली पड़े हुए हैं। राज्य के अधिकतर विश्वविद्यालयों में,

अनुबंध आधारित और अन्य वैकल्पिक साधनों से काम चलाऊ व्यवस्था की गई है, ताकि शिक्षण कार्य को धक्का मारा जा सके, सबसे अधिक परेशानी पीएचडी करने वाले छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ रही है। चौधरी देवीलाल यूनिवर्सिटी सिरसा और चौधरी रणबीर सिंह यूनिवर्सिटी जींद में भी 60 प्रतिशत पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं। इन विश्वविद्यालयों में गैर शैक्षणिक पदों की भी यही स्थिति है।
पीएचडी कराने के पांच से 10 लाख ले रहे निजी विश्वविद्यालय

हरियाणा के सरकारी विश्वविद्यालयों में गाइड के अभाव में छात्र-छात्राएं निजी विश्वविद्यालयों में पांच से 10 लाख तक रूपये का भुगतान कर पीएचडी करने को मजबूर हैं। ऐसे में कई निजी विश्वविद्यालयों ने लूट के अड्डे तक खोल लिए है। उच्च शिक्षा विभाग को निरंतर शिकायतें भेजी जा रही हैं कि कई निजी विश्वविद्यालय सेवानिवृत प्रोफेसरों को पार्ट टाइम अपने यहां रखकर पीएचडी करने वाले छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं,

लेकिन ऐसे निजी विश्वविद्यालयों पर उच्च शिक्षा विभाग का कोई नियंत्रण नहीं हैं। शिक्षकों के अभाव में विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा सेल्फ फाइनेंस कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। इन कोर्स में छात्रों को ज्यादा फीस का भुगतान करना पड़ रहा है।

स्टाफ के अभाव में विश्वविद्यालय अपने यहां पढ़ने वाले छात्रों के रिजल्ट तक निजी कंपनियों को आउटसोर्स कर रहे हैं। इन निजी कंपनियों के बाबू रिजल्ट में निरंतर गलतियां करते हैं, जिससे हजारों छात्रों के परीक्षा परिणाम लंबे समय तक लटके रहते हैं।
सरकार शुरू कर चुकी खाली पदों को भरने की प्रक्रिया: महीपाल ढांडा

नूंह के कांग्रेस विधायक चौधरी आफताब अहमद द्वारा विधानसभा में उठाए गए एक सवाल के जवाब में उच्च शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने कहा है कि हरियाणा के सरकारी एवं एडेड कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों में शिक्षकों व कर्मचारियों के खाली पदों को भरने को लेकर सरकार ने कई स्तरों पर प्रक्रिया शुरू कर दी है। 2424 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती के लिए हरियाणा लोक सेवा आयोग को मांग भेजी जा चुकी है।

विधानसभा में जानकारी दी गई कि 274 कालेजों में अधिकारियों-कर्मचारियों के 15 हजार 668 पदों में से 8645 पद खाली पड़े हैं। 158 कलेजों में क्लास वन के पद खाली हैं। इन पदों को भरने की प्रक्रिया धीरे-धीरे पूरी की जा रही है।
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