बिहार कांग्रेस में बड़े बदलाव संभव, संगठन का नए सिरे से सृजन होगा: डॉ. अखिलेश (फाइल फोटो)
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस अब आत्ममंथन से आगे बढ़कर निर्णायक बदलाव की ओर कदम बढ़ा रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने साफ शब्दों में कहा है कि बिहार कांग्रेस में बड़े संगठनात्मक बदलाव तय हैं और पार्टी को नए सिरे से खड़ा किया जाएगा।
उनका यह बयान साफ संकेत देता है कि कांग्रेस अब पुराने प्रयोगों और आधे-अधूरे फैसलों से आगे निकलने की तैयारी में है।
पटना प्रवास के दौरान जागरण से बातचीत में डॉ. सिंह ने कहा कि विधानसभा चुनाव में हार को सिर्फ कांग्रेस तक सीमित करके देखना राजनीतिक रूप से गलत होगा। यह महागठबंधन की सामूहिक पराजय है, क्योंकि सभी घटक दलों की सीटें घटी हैं।
उन्होंने कहा कि पोस्टल बैलेट और अंतिम परिणामों के अंतर ने कई सवाल खड़े किए, जिन पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
कांग्रेस के गिरते प्रदर्शन पर डॉ. अखिलेश ने स्पष्ट कहा कि पार्टी को मैदान की राजनीति में लौटना होगा। उन्होंने दो टूक कहा राजनीति में शार्टकट नहीं होता। जनता के मुद्दों से कटकर कोई पार्टी मजबूत नहीं बन सकती। उन्होंने जोर दिया कि कांग्रेस को सिर्फ चुनावी समय में नहीं, बल्कि हर दिन जनता के संघर्षों में साथ खड़ा दिखना होगा। उनके मुद्दों से जुडऩा होगा।
चुनाव से ठीक पहले प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी बदलने के फैसलों पर उन्होंने माना कि प्रयोगों का नुकसान हुआ, लेकिन यह भी जोड़ा कि अगर कांग्रेस अकेली हारी होती तो जिम्मेदारी अलग तरह से तय होती। जब पूरा गठबंधन फिसला है, तो हार भी सामूहिक है और उससे सबक भी सामूहिक रूप से लेना होगा।
राजद से अलग होकर चुनाव लड़ने की उठ रही मांग पर डॉ. सिंह ने संतुलित, लेकिन राजनीतिक रूप से सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यह मांग कोई नई नहीं है। 2010 में कांग्रेस अकेले लड़ी और चार सीटों तक सिमट गई। मौजूदा दौर गठबंधन की राजनीति का है, जिसका उदाहरण भाजपा-जदयू की जीत है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि गठबंधन को मजबूती देने के लिए ढांचे, समन्वय और रणनीति तीनों स्तरों पर व्यापक सुधार जरूरी हैं।
डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह के बयान से साफ है कि बिहार कांग्रेस अब सिर्फ समीक्षा नहीं, बल्कि पुनर्निर्माण की राह पर बढ़ने जा रही है। संगठन में बदलाव, रणनीति में आक्रामकता और जनता से सीधा जुड़ाव यही आने वाले समय में कांग्रेस की नई राजनीतिक दिशा होगी।
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