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नीलगायों के आतंक से त्रस्त अन्नदाता, प्रशासनिक चुप्पी पर गहराता संकट

Chikheang 4 day(s) ago views 100
  



जागरण संवाददाता, प्रयागराज। प्रयागराज जनपद के यमुना पार क्षेत्र में इन दिनों किसान दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। एक ओर मौसम और लागत का दबाव है, तो दूसरी ओर खेतों में घुसती नीलगायें उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फेर रही हैं।

बारा तहसील के धरा, बवंधर, सोनवै, छतहरा, बसहरा, लौहगरा, चामू, छीड़ी, सरसेड़ी, तातारगंज, डेराबारी सहित दर्जनों गांवों में नीलगायों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि रबी फसलों का बचना मुश्किल हो गया है। फसल पकने की अवस्था में जैसे ही नीलगायों का झुंड खेतों में घुसता है, खड़ी फसल रौंद दी जाती है।

गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलें उनके लिए आसान शिकार बन चुकी हैं। किसानों का कहना है कि दिन-रात की मेहनत, खाद-बीज और सिंचाई पर किया गया खर्च कुछ ही घंटों में बर्बाद हो जाता है। हालात यह हैं कि कई गांवों में किसान रात भर खेतों की रखवाली करने को विवश हैं, फिर भी फसल बचा पाना संभव नहीं हो पा रहा।

स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब आवारा गोवंश भी खेती को नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि इस विकराल समस्या को लेकर वे तहसील और ब्लॉक स्तर पर कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से न तो कोई ठोस कदम उठाया गया और न ही मुआवजे की कोई व्यवस्था की गई।

क्षेत्र के अमरीश पांडे, शिवम सिंह, तेज बहादुर, महेश त्रिपाठी, शांतनु ओझा सहित क्षेत्र के किसानों का मानना है कि यदि समय रहते नीलगायों के नियंत्रण, सामूहिक तारबंदी, सोलर फेंसिंग अथवा अन्य वैज्ञानिक उपाय नहीं किए गए, तो खेती करना घाटे का सौदा बन जाएगा।

जरूरत इस बात की है कि प्रशासन अन्नदाता की पीड़ा को गंभीरता से समझे और तात्कालिक राहत के साथ स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल करे, ताकि खेतों में लहलहाती फसलें यूं ही उजड़ने से बच सकें।
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