जागरण संवाददाता, बांका। राज्य में सहकारिता व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। बांका जिले सहित पूरे बिहार की कुल 4246 प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) को ई-पैक्स घोषित किया गया है। इसके तहत इन समितियों के कार्यों को पूरी तरह डिजिटल प्लेटफार्म पर लाया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को डिजिटल सेवाओं का सीधा लाभ मिलेगा।
ई-पैक्स घोषित समितियों में बांका जिले की 103, भागलपुर की 156, मुंगेर की 58 तथा पड़ोसी जिला जमुई की 107 पैक्स शामिल हैं। नाबार्ड बिहार क्षेत्रीय कार्यालय एवं सहकारिता विभाग की सतत निगरानी और मार्गदर्शन में यह उपलब्धि संभव हो सकी है।
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने कहा कि राज्य की सहकारी समितियों को आधुनिक बनाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने बताया कि ई-पैक्स के माध्यम से अब पैक्स में डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिलेगा और मैनुअल कार्यप्रणाली को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा। इससे न केवल कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
उन्होंने कहा कि ई-पैक्स के रूप में विकसित की जा रही पैक्स समितियों को कंप्यूटर, प्रिंटर समेत अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध करा दिए गए हैं। समितियों में कैश बुक का नियमित अपडेटेशन किया जा रहा है, ताकि पेपरलेस वर्क की व्यवस्था को पूरी तरह लागू किया जा सके।
पेपरलेस वर्क से बढ़ेगी पारदर्शिता
भागलपुर-बांका के सहकारिता बैंक अध्यक्ष्र जितेंद्र सिंह ने कहा कि नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह की सतत निगरानी से ई-पैक्स घोषित समितियों में अब सभी कार्य आनलाइन किए जाएंगे। प्रतिदिन डे-ओपन और डे-एंड करने का निर्देश दिया गया है। जिससे पूरे दिन के लेन-देन और कार्यों का डिजिटल रिकार्ड सुरक्षित रहे। इससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम होगी और निगरानी व्यवस्था भी सुदृढ़ होगी।
पैक्सों के डिजिटलीकरण से वित्तीय लेन-देन पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित होगा। कॉमन सर्विस सेंटर से गांवों को मिलेगी सुविधा मिलेगी। ई-पैक्स को केवल सहकारी समिति तक सीमित न रखते हुए मल्टीपरपज सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके तहत ई-पैक्स में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) खोले जा रहे हैं। यहां ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधा के अलावा सरकारी योजनाओं से संबंधित सेवाएं, प्रमाणपत्र आवेदन, बस और रेलवे टिकट बुकिंग जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। कुल मिलाकर, ई-पैक्स की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है। - गौतम कुमार सिंह, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड बिहार |