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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक भवन में अपने मंत्रियों को स्पष्ट और राजनीतिक संकेतों से भरे निर्देश देते हुए सरकार की आगामी रणनीति सामने रखी। 24 जनवरी को होने वाले उत्तर प्रदेश दिवस को लेकर मुख्यमंत्री ने राजनीतिक और सांस्कृतिक एजेंडा तय किया।
कहा कि इस बार यूपी दिवस के कार्यक्रम केवल प्रदेश में ही नहीं, बल्कि उन राज्यों में भी आयोजित किए जाएं, जहां उत्तर प्रदेश के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। इसका उद्देश्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, निवेश संभावनाओं और सरकार की उपलब्धियों को देशभर में मजबूती से प्रस्तुत करना है।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि जिस राज्य में यूपी दिवस का कार्यक्रम हो, वहां के राज्यपाल की उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाए, ताकि कार्यक्रम की गरिमा और प्रभाव दोनों बढ़ें।
लोक भवन में आयोजित इस बैठक में यह भी कहा गया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटे हैं, जिसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। फार्म-6 भरकर मतदाता बनवाने का अभियान तेजी से चलाया जाए। कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे। इसे लोकतंत्र की मजबूती से जोड़ते हुए यह भी संकेत दिए गए कि यह विषय राजनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने जिलों में जाकर जमीनी हालात देखने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मंत्री केवल औपचारिक दौरे न करें, बल्कि कम से कम दो दिन अपने-अपने प्रभार वाले जिलों में रुकें।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पार्टी पदाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों से संवाद करें। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जिलों से मिलने वाला फीडबैक सरकार की नीतियों और निर्णयों में अहम भूमिका निभाता है।
वित्तीय मोर्चे पर भी मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को सतर्क किया। कहा कि सभी मंत्री अपने-अपने विभाग के बजट खर्च की समीक्षा करें, यह देखें कि कहां खर्च कम है और आगे किन योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता पड़ सकती है। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल बजट खर्च करना नहीं, बल्कि योजनाओं का असर जमीन पर दिखना चाहिए। |
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