राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश में भूजल की सेहत खराब है। आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, बलिया, प्रयागराज, उन्नाव में पानी मे आर्सेनिक और फ्लोराइड मिल रहा है। इसके अलावा जांच में कई अन्य प्रदूषक भी मिले हैं। इन जिलों में अब शुद्ध पानी के लिए जल जीवन मिशन ने कई योजनाएं शुरू की गई हैं।
खासतौर से इन जिलों के प्रभावित क्षेत्रों में पीने के लिए सतही जल पहुंचाया जाएगा, क्योंकि इन प्रदूषकों को हटाने के लिए शोधन यंत्र और तकनीक पर अधिक खर्च होता है। जल जीवन मिशन की रिपोर्ट के अनुसार आगरा के 906 में से 567 गांवों के भूजल की गुणवत्ता ठीक नहीं है।
यहां पानी में आर्सेनिक, फ्लोराइड, नाइट्रेट मिल रहा है। फिरोजाबाद में 790 गांवों में से 351 के भूजल में में फ्लोराइड व अन्य प्रदूषक मिले हैं। बलिया में 100 मीटर की गहराई के पानी में भी आर्सेनिक मिला है।
उन्नाव के भूजल में फ्लोराइड, नाइट्रेट, आयरन मिला है। यही हाल मथुरा का भी है। यहां खनिज, नमक व घुलित ठोस (टीडीएस) का स्तर मानक से अधिक मिला है।
उन्नाव में जल जीवन मिशन, जल निगम (ग्रामीण), राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन, भूजल विभाग, केंद्रीय भूजल बोर्ड और मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमयूटी) गोरखपुर के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने अध्ययन किया।
अध्ययन में निष्कर्ष निकला कि पानी से फ्लोराइड और आयरन जैसे प्रदूषकों को हटाने के लिए विशेष शोधन संयत्रों की जरूरत पड़ती है, जिससे भूजल आधारित योजनाओं का रखरखाव जटिल और महंगा हो जाता है, इसलिए वहां सतही जल आधारित योजनाएं ज्यादा प्रभावी होंगी।
इसी तरह फ्लोराइड व आर्सेनिक प्रभावित अन्य जिलों के लिए भी सतही स्रोत आधारित पाइप पेयजल योजनाओं को शुरू किया गया है। जिससे लोगों को शुद्ध जल पहुंचाया जा सके।
ये हो रहा नुकसान
पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा 1.5 पीपीएम (पार्ट पर मिलियन) से अधिक होने पर फ्लोरोसिस बीमारी होने की आशंका रहती है। शरीर में कुल फ्लोराइड का 96 प्रतिशत हिस्सा हड्डियों व दांतों में पाया जाता है, लेकिन इसकी मात्रा अधिक होने पर दांतों का क्षरण, हड्डियों में टेढ़ापन या अन्य विकृतियां हो जाती हैं।
वहीं, आर्सेनिक के कारण उल्टी, दस्त हो सकता है। लंबे समय तक आर्सेनिक युक्त पानी पीने से त्वचा पर काले धब्बे, घाव, फेफड़े, मूत्राशय, त्वचा कैंसर भी हो सकता है। |