दिल्लीवासियों को ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी। फाइल फोटो
मोहम्मद साकिब, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बढ़ते ट्रैफिक जाम से निजात दिलाना ट्रैफिक पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। सुबह और शाम के पीक ऑवर्स में दफ्तर जाने वालों की भीड़, बाजारों में बढ़ती चहल-पहल और लगातार बढ़ती वाहनों की संख्या के कारण दिल्ली की सड़कों पर रफ्तार अक्सर थम जाती है।
इसी समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सरकार के निर्देश पर एक नई पहल शुरू की गई है, जिसके तहत दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ 600 डीटीसी बस चालकों को तैनात किया गया है।
इन डीटीसी चालकों को तैनाती से पहले टोडापुर स्थित ट्रैफिक पुलिस मुख्यालय में विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें ट्रैफिक नियमों की जानकारी, सिग्नल मैनेजमेंट, जाम खुलवाने की तकनीक, सड़क पर त्वरित निर्णय लेने की प्रक्रिया और ट्रैफिक पुलिस के साथ समन्वय बनाकर काम करने के गुर सिखाए गए।
इसके साथ ही उन्हें यह भी समझाया गया कि किस तरह वे प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों, बिना कागजात चल रही गाड़ियों और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान कर ट्रैफिक पुलिस को सहयोग दे सकते हैं।
प्रत्येक रेंज में करीब 100 चालकों की तैनाती
यातायात पुलिस के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त दिनेश कुमार गुप्ता के मुताबिक, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की छह रेंज मध्य, पश्चिमी, उत्तरी, पूर्वी, दक्षिणी और नई दिल्ली राजधानी के कुल 15 ट्रैफिक जिलों को कवर करती हैं। इन्हीं रेंजों में लगभग 600 डीटीसी बस चालकों की तैनाती की गई है।
प्रत्येक रेंज को करीब 100 चालक उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि जाम प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त मैनपावर मिल सके और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके। इस संयुक्त प्रयास से न सिर्फ जाम की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है, बल्कि प्रदूषण पर भी अंकुश लगाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आने की उम्मीद है।
रोजाना लगने वाले जाम वाली जगहों पर किया गया तैनात
ट्रैफिक पुलिस द्वारा पहले ही राजधानी के उन इलाकों की पहचान कर ली गई है, जहां रोजाना जाम की स्थिति बनती है। इनमें व्यस्त चौराहे, फ्लाईओवर के नीचे के हिस्से, बड़े बाजार, मेट्रो स्टेशनों के आसपास की सड़कें और दफ्तरों के पीक आवर्स वाले प्रमुख रूट शामिल हैं। इन्हीं स्थानों पर डीटीसी चालकों को तैनात किया गया है, जहां वे ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर यातायात को सुचारू बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
अनुभवी बस चालकों का इसलिए किया गया चयन
इस फैसले के पीछे एक और जमीनी हकीकत भी चर्चा में है। डीटीसी के कुछ कर्मचारियों का कहना है कि इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े के विस्तार के बाद कई नई बसों में पहले से ड्राइवर तैनात हैं।
ऐसे में पारंपरिक डीटीसी बसों के कुछ ड्राइवरों के पास नियमित ड्यूटी कम हो गई थी। सरकार ने इन्हीं अनुभवी चालकों को ट्रैफिक पुलिस के साथ जोड़कर संसाधनों का बेहतर उपयोग किया है, ताकि वर्षों का अनुभव बेकार न जाए।
पहल का दिखने लगा असर
ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जहां-जहां डीटीसी ड्राइवर तैनात किए गए हैं, वहां जाम की स्थिति को संभालने में साफ मदद मिली है।
पीक ऑवर्स में ट्रैफिक डायवर्जन, गलत पार्किंग हटवाना और बस लेन को चालू रखना पहले से आसान हुआ है। लंबे समय से सड़कों पर बस चलाने वाले डीटीसी चालक ट्रैफिक के मिजाज को अच्छी तरह समझते हैं और यही अनुभव इस नई जिम्मेदारी में काम आ रहा है। |
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