जेलेंस्की ने साल 2019 में राष्ट्रपति पद का चुनाव जीता था। (जागरण)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमीर ओलेक्सांद्रोविच जेलेंस्की कभी एक कॉमेडियन हुआ करते थे। एक समय था जब जलेंस्की यूक्रेन के हर घर में देखे जाते थे। निजी जिंदगी हो या सार्वजनिक जीवन, दोनों ही जगह जेलेंस्की हल्के-फुल्के अंदाज में ही बात करते थे।
जब उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति पद के चुनाव लड़ने का फैसला किया, तब भी वही हल्कापन राजनीति में ले आए। उनके विरोधी लंबी-लंबी स्पीच देते, लेकिन वे चीजों को हल्का रखते थे। वह अपनी कॉमेडी टीम क्वार्टल 95 के साथ पूरे यूक्रेन घूमे, वोटरों से ऐसे जुड़े जैसे कोई और नहीं कर पाया।
चेहरे की चमक हुई फीकी
अप्रैल 2019 में दूसरे राउंड में उन्होंने 73 प्रतिशत वोटों से शानदार जीत हासिल की। उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको को सबसे बड़े अंतर से हराया।
लेकिन वक्त के साथ जेलेंस्की के चेहरे की वो चमक धीमी पड़ती गई। यूक्रेन-रूस की जंग साल 2022 में शुरु हुई थी। चार साल बीत चुके हैं। जेलेंस्की अब बहुत अलग दिखते हैं।
उनके चेहरे पर अब गहरी लकीरें, उम्र से ज्यादा युद्ध की थकान है। चेहरे की चमक अब गायब है। बढ़ी हुई दाढ़ी और मिलिट्री स्टाइल के कपड़े अब उनकी पहचान बन गई हैं। ऐसा लगता है जैसे जंग ने उन्हें वक्त से पहले बूढ़ा कर दिया है।
ज्यों के त्यों हैं पुतिन
दूसरी तरफ, व्लादिमीर पुतिन बिल्कुल वैसे ही हैं जैसे 2022 में थे। युद्ध की शुरुआत से अब तक उनकी तस्वीरें देखें तो लगता है समय उनके लिए रुक गया है। यह दोनों नेताओं के बीच का सबसे बड़ा विजुअल कंट्रास्ट है, जो युद्ध की पूरी कहानी बयां करता है।
रूस के हमले के साथ ही जेलेंस्की का ट्रांसफॉर्मेशन शुरू हो गया। उन्होंने कीव छोड़ने के ऑफर ठुकरा दिए और कैपिटल की सड़कों से हैंडहेल्ड वीडियो रिकॉर्ड किए। युद्ध के चौथे सालगिरह पर जेलेंस्की ने बैंकोवा स्ट्रीट के बंकर से वीडियो जारी किया।
उन्होंने कहा, “यह ऑफिस, यह छोटा कमरा बंकर में... यहां से मैंने युद्ध की शुरुआत में दुनिया के नेताओं से बात की। यहां मैंने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से बात की थी। तब उन्होंने कहा था कि \“वोलोडिमीर, खतरा है, आपको यूक्रेन छोड़ना चाहिए। हम मदद के लिए तैयार हैं।\“ लेकिन मैं रहा।“
जेलेंस्की का बदल गया लुक
जैसे-जैसे युद्ध खींचता गया वैसे ही जेलेंस्की के सूट्स की जगह ऑलिव ग्रीन मिलिट्री कपड़े ने ले लिए। लेकिन पुतिन की तरफ से कोई बदलाव नहीं था। वे क्रेमलिन के बड़े हॉल से टीवी पर संबोधन देते रहे, अक्सर बहुत लंबी टेबल पर बैठकर ऐसा करते थे।
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