इंदौर के भागीरथपुरा में डॉक्टरों की टीम।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण हुई मौत का आकड़ा लगातार बढ़ते जा रहा है। दूषित पानी के कारण अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। तीन नई मौत की जानकारी मंगलवार को सामने आई है।
इनमें 80 वर्षीय महिला हरकुंवर ग्रैरईया निवासी कुलकर्णी नगर, 90 वर्षीय श्रावण नथ्थु खुपराव निवासी भागीरथपुरा और 47 वर्षीय रामकली पत्नी जगदीश निवासी भागीरथपुरा शामिल है।
प्रशासन ने अब तक 18 लोगों को मुआवजा दिया है। दो मृतकों के नाम प्रशासन की सूची में शामिल होने के बाद सामने आया है। भागीरथपुरा में गलियों में अभी भी सन्नाटा छाया हुआ है। लोग अपने परिवार के सदस्यों को खोने का गम भुला नहीं पा रहे हैं। इतनी मौत होने के बाद भी क्षेत्र में दूषित पानी सप्लाय हो रहा है।
भागीरथपुरा में बेटी के घर रूकने आई 80 वर्षीय मां की मौत हो गई है। महिला का नाम हरकुंवर ग्रैरईया निवासी कुलकर्णी नगर है। महिला अपनी बेटी के घर सरकारी स्कूल के पास रूकने के लिए आई थी, इसी दौरान उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। महिला की बेटी निर्मला ने बताया कि मां हरकुंवर हमारे यहां 20 दिसंबर से रूकने के लिए आई थी।
30 दिसंबर को उन्हें उल्टी-दस्त की समस्या होने लगी। इसके बाद निजी क्लिनिक पर उन्हें दिखाया और दवाई लेकर आए। तबीयत खराब होने पर उन्हें भाई सुनिल के यहां कुलकर्णी नगर वापस भेज दिया। यहां एक जनवरी को हालत गंभीर हुई और रात में उनकी मौत हो गई। दो जनवरी को उनका अंतिम संस्कार हुआ।
यह पहली बार हुआ जब उनको उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी। दूषित पानी के कारण ही उनकी मौत हुई है। लेकिन इसके बाद भी अभी तक हमारे घर पर कोई सर्वे करने तक नहीं आया। हमारे यहां अभी भी दूषित पानी ही सप्लाय हो रहा है। पीने का पानी हम खरीदकर ला रहे हैं। घर में अभी चार सदस्य बीमार निर्मला ने बताया कि मां की दूषित पानी के कारण मौत हो गई, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से कोई मिलने तक नहीं आया।
मां कभी हमारे यहां तो कभी भाई के साथ रहती थी। हमारे घर में अभी करीब चार सदस्य बीमार है। मेरी भांजी पूजा सीएचएल अस्पताल में भर्ती है। उसकी बेटी काव्या(11) को अस्पताल दिखाया है। मैं खूद भी बीमार हूं और मेरी बेटी महक भी उल्टी-दस्त की शिकायत से परेशान है।
महाराष्ट्र में हुआ बुजुर्ग का अंतिम संस्कार श्रावण नथ्थु खुपराव की मौत 29 दिसंबर को इलाज के दौरान अस्पताल में हुई है। बेटे श्रीकृष्ण ने बताया कि 25 दिसंबर को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया था। 26 दिसंबर को हालत में सुधार हुआ, इसके बाद तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। उनका अंतिम संस्कार महाराष्ट्र के बुलढ़ाना स्थित सेलापुर में हुआ, यह उनका पेतृक गांव है।
इनका पोता नगर निगम की पानी की टंकी पर कार्य करता है और बेटा सुरक्षाकर्मी का कार्य करता है। इसी के चलते परिवार इंदौर में ही रहता है। 47 वर्षीय रामकली की मौत इसी प्रकार रामकली पत्नी जगदीश की मौत हुई है। बेटे ने बताया कि 28 दिसंबर को उनकी मौत हुई है। 28 दिसंबर को उनको उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी। जिसके बाद इलाज के लिए उन्हें निजी अस्पताल लेकर गए। लेकिन उनकी मौत हो गई। इससे पहले उन्हें किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य की समस्या नहीं थी।
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