तस्वीर- AI जेनरेटड इमेज
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए घरों तक पेयजल आपूर्ति के लिए हजारों करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, लेकिन स्थिति यह है कि सिर्फ 75 प्रतिशत का कार्य ही शुरू हो पाया है। यही हाल घरों को सीवर कनेक्शन से जोड़ने का है। इसमें भी योजनाएं अधूरी पड़ी हैं। स्वीकृत परियोजनाओं में 25 प्रतिशत का कार्य ही शुरू नहीं हो पाया है।
अमृत 2.0 योजना के तहत प्रदेश में 45 लाख से अधिक घरों में पेयजल आपूर्ति के कनेक्शन दिया जाना है। इसके अलावा सीवर निस्तारण परियाेजना के तहत 7.59 लाख घरों को सीवर कनेक्शन भी देने हैं। इस वित्तीय वर्ष में इन परियोजनाओं को पूरा होना था, लेकिन धीमी गति से कार्य के कारण जो 75 प्रतिशत कार्य शुरू हुआ था, वह भी पूरा नहीं हो पाया है।
आंकड़ों को देखें तो पानी आपूर्ति की जिन 309 परियोजनाओं का कार्य शुरू हुआ था, उसमें 26.46 लाख घरों को पानी का कनेक्शन दिए जाने का लक्ष्य था। इसमें से लगभग 20 लाख घरों तक पानी का कनेक्शन पहुंच चुका है।
इसी तरह घरों को सीवर कनेक्शन देने की 36 में से 23 परियोजनाएं शुरू हो गई हैं। इसमें 4.27 लाख घरों को सीवर कनेक्शन से जोड़े जाने का लक्ष्य था। इसमें लक्ष्य का 70 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है।
बता दें कि अमृत 1.0 में प्रदेश के लिए 300 से अधिक परियोजनाओं की स्वीकृति मिली थी। इसके लिए 11 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए थे। वहीं अमृत 2.0 में पानी आपूर्ति की 435 और सीवर की 36 परियोजनाएं स्वीकृत हुई थी। इसमें पानी आपूर्ति के लिए 9,756.05 करोड़ रुपये और सीवर की परियोजनाओं के लिए 6898 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे।
सरकार हाल ही में अमृत 2.0 के तहत बरेली और कानपुर में 580 करोड़ रुपये से ज्यादा की दो बड़ी पेयजल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इससे लाखों लोगों को फायदा होगा।
कुछ उपलब्धियां भी
- अयोध्या में 24 घंटे सातों दिन पानी की आपूर्ति
- सीतापुर, खुर्जा, रायबरेली सहित चार फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन की जिम्मेदारी महिलाओं को
- पानी की जांच के लिए 800 अमृत मित्र महिलाओं की तैनाती
|
|