cy520520 • 2026-1-5 19:56:39 • views 1088
जागरण संवाददाता, बांदा। पुलिस के मुखबिर से उधार दिए रुपये मांगना प्रापर्टी डीलर को महंगा पड़ गया। पुलिस कर्मियों ने प्रापर्टी डीलर से न केवल बीस लाख रुपये वसूल लिए बल्कि उसे फर्जी मुकदमें में जेल भी भेज दिया। पीड़ित प्रापर्टी डीलर ने अपने साथ हुए जुल्म पर अदालत का सहारा लिया। न्यायालय ने आरोपित सभी छह पुलिस कर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।
बबेरू कस्बा के हरदौली गांव निवासी कमालउद्दीन किसानी के साथ प्रापर्टी डीलर का कार्य करते हैं। उन्होंने न्यायालय में 156 (3) के तहत वाद दायर किया था। बताया कि उससे गांव के पुलिस मुखबिर बउवा सिंह ने सात जनवरी 2021 को अपनी घरेलू समस्या बताते हुए ढाई लाख रुपये चक्की लगाने के लिए उधार लिए थे। बाद में जब उसने अपने उधार दिए रुपये कुछ दिनों बाद मांगे तो उसने पुलिस से उसकी झूठी शिकायत कर दी कि वह गांजा की तस्करी करता है।
इसको लेकर फतेहपुर से स्कार्पियो में वापस अपने घर जाते समय तत्कालीन अतर्रा थानाध्यक्ष अरविंद कुमार, एसआइ सुधीर कुमार चौरसिया, हेड कांस्टेबल महेश्वर प्रसाद, कांस्टेबल अंकित वर्मा, अरमान अली व अखिलेश कुमार पांडेय ने 24 जुलाई 2023 को बिंदकी थाने की जोनिहा पुलिस चौकी से आधा किलोमीटर पहले उसके असलहे लगा दिए। साथ ही वाहन से खींचकर पीटते हुए अपनी बोलेरो में बैठाकर अतर्रा थाने के पीछे तीसरी मंजिल के पुलिस क्वार्टर में बंद कर दिया। साथ ही धमकी देते हुए 20 लाख रुपये की वसूली कर ली।
इसके बाद भी 27 जुलाई 2023 को उसे गांजा व तमंचा लगाकर जेल भेज दिया। जेल से छूटने के बाद पीड़ित ने एसपी समेत राष्ट्रीय मानव अधिकार का दरवाजा खटखटाया। क्षेत्राधिकारी अतर्रा से जांच कराने में पुलिस कर्मी आरोपित पाए गए। लेकिन उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। एसआइटी जांच भी अभी लंबित है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश गगन कुमार भारती ने इंस्पेक्टर व एसआइ समेत छह पुलिस कर्मियों के विरुद्ध दो जनवरी को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले की पूर्व में जांच हुई थी। यदि इसमें न्यायालय ने आरोपित पुलिस कर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं तो कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। साथ दर्ज मुकदमे के आधार पर विवेचना कराई जाएगी। -
शिवराज एएसपी
आठ माह निलंबित रहे थे इंस्पेक्टर
तत्कालीन अतर्रा थानाध्यक्ष वर्तमान में जिले की बेर्रांव चौकी में तैनात हैं। एएसपी ने बताया कि पूर्व में हुई जांच के क्रम में तत्कालीन थानाध्यक्ष आठ माह तक निलंबित रहे थे। बाद में उनकी बहाली हुई है।
बिना जीडी दर्ज किए की गई थी रवानगी
एएसपी की पूर्व में की गई जांच में यह पाया गया था कि आरोपित पुलिस कर्मी बिना जीडी दर्ज किए व अधिकारियों को बिना जानकारी दिए फतेहपुर रवाना हुए थे। अपने कर्तव्यों में लापरवाही व स्वेच्छारिता, अनुशासनहीनता की गई है। साथ ही अपने निजी स्वार्थ के चलते कर्मचारियों पर दबाव डालते हुए मनमाफिक कार्य कराया जाना भी पाया गया है।
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