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अब टाइगर रिजर्व के बाहर भी होगा बाघों का प्रबंधन, चार जिलों से पायलट प्रोजेक्ट

Chikheang 4 day(s) ago views 897
  

उद्देश्य संघर्ष की घटनाओं को कम करना और बाघ संरक्षण को मजबूत करना



राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ : प्रदेश में बाघों की बढ़ती संख्या के साथ टाइगर रिजर्व के बाहर मानव–वन्यजीव संघर्ष एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। \“\“दैनिक जागरण\“\“ ने भी मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर समाचारीय अभियान चलाया है।

इसी को ध्यान में रखते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार वर्तमान वित्तीय वर्ष में \“\“टाइगर रिजर्व के बाहर बाघों का प्रबंधन\“\“ नामक नई योजना शुरू करने जा रही है। इसका उद्देश्य संघर्ष की घटनाओं को कम करना और बाघ संरक्षण को मजबूत करना है। पहले चरण में पायलट प्रोजेक्ट के तहत खीरी, बिजनौर, पीलीभीत व बहराइच में यह योजना शुरू होगी।

वैश्विक स्तर पर बाघों की कुल संख्या के लगभग 70 प्रतिशत भारत में पाए जाते हैं। प्रदेश में बाघों की संख्या की बात की जाए तो वर्ष 2014 में 117 थी जो 2022 में बढ़कर 205 हो गई है। इनमें से करीब 35 से 40 प्रतिशत बाघ टाइगर रिजर्व के बाहर वन क्षेत्रों से सटे आबादी और कृषि क्षेत्रों में विचरण करते हैं। तराई क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं।

इसी समस्या के समाधान के लिए प्रदेश सरकार टाइगर रिजर्व के बाहर बाघों का प्रबंधन योजना शुरू करने जा रही है। योजना के प्रथम चरण में दक्षिणी खीरी वन प्रभाग, बिजनौर सामाजिक वानिकी प्रभाग, पीलीभीत सामाजिक वानिकी प्रभाग और बहराइच वन प्रभाग को शामिल किया गया है।

  
यह होंगी प्रमुख गतिविधियां

  • मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए रैपिड रिस्पांस सिस्टम के तहत होगा आधुनिक तकनीक का उपयोग
  • इसमें एआइ, ड्रोन, कैमरा ट्रैप, एम-स्ट्राइप्स और वायरलेस सिस्टम का और अधिक होगा प्रयोग
  • फील्ड कर्मचारियों और स्थानीय समुदायों का होगा क्षमता विकास
  • रेस्क्यू संबंधी सुविधाओं का किया जाएगा सुदृढ़ीकरण
  • विस्तार, जागरूकता और जनसंपर्क के कार्यक्रम होंगे संचालित

मील का पत्थर साबित होगी योजना

प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव अनुराधा वेमूरी ने बताया कि इस योजना का वित्तपोषण राष्ट्रीय कैंपा तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार करेगा।

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योजना का मुख्य उद्देश्य टाइगर रिजर्व के बाहर होने वाली मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को नियंत्रित करना, बाघों के फैलाव और जीन प्रवाह को सुनिश्चित करना तथा स्थानीय समुदायों को बाघ संरक्षण से जोड़ते हुए उनकी आजीविका का संरक्षण करना है।

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उन्होंने उम्मीद जताई कि यह योजना न केवल मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने में सहायक होगी, बल्कि टाइगर रिजर्व के बाहर बाघ संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।

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