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SMVD मेडिकल कॉलेज के भविष्य पर सवाल; एमबीबीएस सीटों के आवंटन विवाद के बीच कालेज के सुचारू रूप से चलने पर शंका

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राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग टीम की रिपोर्ट पर निर्भर करता है कालेज चलाने की स्थायी अनुमति, सबकी निगाहें आयोग पर।



राज्य ब्यूरो, जम्मू। एमबीबीएस सीटों के आवंटन को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कालेज के सुचारू रूप से चलने को लेकर ही शंका उत्पन्न हो गई है। पांच महीनों में दो बार कालेज का निरीक्षण करने वाले राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। टीम की रिपोर्ट पर ही सब कुछ निर्भर करता है।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की चार सदस्यीय टीम शुक्रवार को कालेज के निरीक्षण के लिए पहुंची थी। उन्होंने कालेज में फैकल्टी की नियुक्ति से लेकर अन्य सभी सुविधाओं का निरीक्षण किया। टीम के निरीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर ही कालेज चलाने की स्थायी अनुमति दी जाती है।
टीम ने औचक दौरा कर जांची व्यवस्था

आयोग नेे पहला निरीक्षण अगस्त 2024 में किया था और इसके बाद ही 2025-26 सत्र के लिए एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू करनेे की इजाजत दी थी। अब जनवरी महीने के प्रथम सप्ताह में आयोग की टीम ने औचक निरीक्षण किया।इसमें टीम को कालेज प्रबंधन ने सभी सुविधाओं के बारे में जानकारी दी।

टीम ने कालेज के अतिरिक्त नारायणा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हाेंने कई कमियां गिनाई।टीम ने प्रशासनिक ब्लाक,कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, वार्ड, आपरेशन थियेटर सहित सभी सुविधाओं का निरीक्षण किया।

डा. अमलेंदु यादव के नेतृत्व वाली टीम में डा. वंदना मेहता, शैलेश कुमार और फोरेंसिक साइंस के एक सीनियर प्रोफेसर शामिल थे।कहा जा रहा है कि टीम ने मेडिकल कालेज चलाने के लिए ढांचागत सुविधाओं में कई कमियां पाईं। इससे अब इस कालेज के भविष्य पर भी प्रश्नचिन्ह लग गए हैं।
आयोग के फैसले पर टिकी सबकी नजर

श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के सदस्य पहले से ही कालेज को बंद करने की मांग करते आ रहे हैं। ऐसे में अब देखना यह है कि क्या आयोग की टीम अपने इस निरीक्षण के बाद कालेज को दी गई अनुमति को रद कर देती है या फिर एक बार फिर से कुछ महीनों बाद निरीक्षण करती है।

चिकित्सा शिक्षा और इस मेडिकल कालेज से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उन्हें इस निरीक्षण की कोई जानकारी नहीं थी। इस कालेज में डेढ़ सौ से अधिक फैकल्टी सदस्य हैं जो कि कालेज को चलाने के लिए पर्याप्त हैं। टीम ने जो भी दस्तावेज मांगे हैं, वे उन्हें दिए गए हैं। अब टीम पर निर्भर करता है कि वे अपनी रिपोर्ट क्या देती है। हालांकि कालेज कोे बंद करने की भी कुछ अधिकारी दबे स्वर में बात कर रहे हैं लेकिन अभी इस पर कुछ भी स्पष्ट नहीं है।
कालेज बंद हुआ तो फैकल्टी का क्या होगा

कालेज को अगर बंद कर दिया जाता है तो इसमें नौकरी कर रहे डेढ़ सौ के आसपास फैकल्टी सदस्यों का क्या होगा। उन्हें यहां से बर्खास्त कर दिया जाएगा या फिर उनकी सेवाओं को कहीं अन्य जगहों पर लिया जाएगा। इनमें से अधिकांश फैकल्टी सदस्य जम्मू-कश्मीर के ही रहने वाले हैं। हालांकि अभी किसी भी मुद्दे पर कोई भी सामने आकर नहीं बोल रहा   है।
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