इस साल भारत कई मिशन करेगा लॉन्च। (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। शुभांशु शुक्ला की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की पहली यात्रा की सफलता के बाद भारत अंतरिक्ष में मानव भेजने के अपने पहले मिशन की दिशा में कदम बढ़ाने को तैयार है, जब इस वर्ष के आखिर में मानवरहित गगनयान मिशन को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया जाएगा। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
अंतरिक्ष क्षेत्र की निजी कंपनियां स्काईरूट एयरोस्पेस और अग्निकुल कासमास भी इस वर्ष अपने राकेट विक्रम-1 और अग्निबाण के जरिये उपग्रह प्रक्षेपित करने की तैयारी कर रही हैं। साथ ही हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड और लार्सन एंड टुब्रो द्वारा पूरी तरह निर्मित पोलर सेटेलाइट लांच व्हीकल (पीएसएलवी) भी प्रक्षेपित होगा, जिसका कॉन्ट्रैक्ट इसरो ने 2023 में दिया था।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने पिछले माह संसद को बताया था कि गगनयान को कक्षा में भेजने का पहला परीक्षण (जी-1) इस वर्ष मार्च में किए जाने की उम्मीद है। इसमें एक ह्यूमनाइड रोबोट (मानव जैसे कार्य करने में सक्षम एआइ संचालित रोबोट) व्योममित्र को भेजा जाएगा। यह रोबोट एक अंतरिक्ष यात्री के कामों को प्रदर्शित करेगा और अंतरिक्ष यान पृथ्वी की निचली कक्षा में महत्वपूर्ण प्रणालियों का परीक्षण करेगा।
आईएसपीए के महानिदेशक ने क्या कहा?
इंडियन स्पेस एसोसिएशन (आईएसपीए) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट ने कहा, \“\“2026 में पीएसएलवी-एन1 के जरिये क्वांटम तकनीक में सफलता, अग्निकुल के 3डी प्रिंटेड इंजन और पिक्सेल के हाइपरस्पेक्ट्रल कान्स्टेलेशन से भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत होगी, साथ ही समर्पित निजी प्रक्षेपण केंद्रों जैसी बुनियादी ढांचे की जरूरतें भी पूरी होंगी।\“\“
आईआईटी-मद्रास में शुरू हुए स्पेस स्टार्टअप अग्निकुल कासमास ने दोबारा इस्तेमाल होने वाले राकेट प्रक्षेपित करने और लागत घटाने के लिए अपने राकेट के ऊपरी हिस्सों को कार्यशील सेटेलाइट में बदलने की योजना बनाई है। अग्निकुल कासमास के संस्थापक व सीईओ श्रीनाथ रविचंद्रन ने बताया कि कक्षा में अपने पहले प्रक्षेपण के बाद अग्निकुल ने हर महीने एक राकेट प्रक्षेपित करने की योजना बनाई है।
क्या है कंपनी का टारगेट?
स्काईरूट एयरोस्पेस ने पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वर्चुअल मौजूदगी में विक्रम-1 रॉकेट को प्रदर्शित किया था। कंपनी का लक्ष्य इस वर्ष की शुरुआत में इसे कमर्शियल पेलोड के साथ प्रक्षेपित करना है। बेंगलुरु स्थित दिगंतारा इंडस्ट्रीज ने पिछले वर्ष मार्च में दुनिया का पहला स्पेस सर्विलांस सेटेलाइट एससीओटी प्रक्षेपित किया था। इस वर्ष उसकी आठ और सेटेलाइट कक्षा में स्थापित करने की योजना है। कंपनी सात सेटेलाइट 2027 में स्थापित करेगी।
कम होगी ईंधन पर निर्भरता
इसरो हाई थ्रस्ट इलेक्टि्रक प्रोपल्शन सिस्टम (एचटीईपी), क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन और स्वदेशी ट्रैवलिंग वेव ट्यूब (टीडब्ल्यूटी) एम्पलीफायर जैसी तकनीक प्रदर्शित करने के लिए टीडीएस-01 सेटेलाइट भी प्रक्षेपित करेगा। एचटीईपी से इसरो भविष्य में आल-इलेक्ट्रिक सेटेलाइट प्रक्षेपित कर सकेगा। यह तकनीक सेटेलाइट को हल्का बनाएगी और रासायनिक ईंधन पर निर्भरता कम करेगी।
एक अधिकारी ने बताया कि चार टन के कम्युनिकेशन सेटेलाइट में दो टन से ज्यादा तरल ईंधन होता है, लेकिन इलेक्ट्रिकल प्रोपल्शन सिस्टम से ईंधन की जरूरत 200 किलोग्राम तक कम हो जाएगी। स्वदेशी टीडब्ल्यूटी एम्पलीफायर से सेटेलाइट ट्रांसपोंडर की महत्वपूर्ण तकनीक में आत्मनिर्भरता हासिल होगी। स्पेस-टेक स्टार्टअप गैलेक्सीआई ने भी पहली तिमाही में दुनिया के पहले मल्टी-सेंसर अर्थ आब्जर्वेशन सेटेलाइट \“मिशन दृष्टि\“ को प्रक्षेपित करने की योजना बनाई है। यह अगले चार वर्षों में सेटेलाइट का एक समूह स्थापित करने की शुरुआत होगी।
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