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चुनाव से पहले नेपाल की राजनीति में घमासान, बिखरा Gen Z आंदोलन; 5 मार्च के इलेक्शन पर संकट के बादल

Chikheang 2025-12-20 01:37:44 views 1100
  

चुनाव से पहले नेपाल की राजनीति में घमासान बिखरा Gen Z आंदोलन (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नेपाल में 5 मार्च को होने वाले प्रतिनिधि मा के आम चुनाव पर संकट गहराता जा रहा है। चुनाव में अब ढाई महीने से भी कम समय बचा है, लेकिन राजनीतिक हालात साफ नहीं हैं। चुनाव रोकने और संसद बहाली की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अब तक 17 याचिकाएं दाखिल हो चुकी है। इन पर सुनवाई जनवरी के पहले हफ्ते से शुरू हो सकती है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

Gen Z आंदोलन के दबाव में बनी प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने चुनाव की तारीख घोषित तो कर दी, लेकिन संसद भंग किए जाने को लेकर कानूनी और राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। CPN-UML और नेपाली कांग्रेस के कई सांसद संसद की बहाली की मांग कर रहे हैं।
\“चुनाव की 60% तैयारियां पूरी\“

इधर, चुनाव आयोग का कहना है कि चुनाव की लगभग 60 प्रतिशत तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए सेना की तैनाती भी शुरू कर दी गई है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला चुनाव की दिशा तय करेगा।

Gen Z आंदोलन खुद अंदरूनी मतभेदों से जूझ रहा है। अंतरिम सरकार के साथ 10 सूत्रीय समझौता हुआ था, लेकिन उसे लागू करने के तरीके पर आंदोलन के भीतर एक राय नहीं बन पाई है। संवैधानिक संशोधन, भ्रष्टाचार जांच और चुनाव सुधार जैसे मुद्दों पर जेन-जी की मांगें अब भी अधूरी हैं।

जेन-जी कोई संगठित राजनीतिक पार्टी नहीं है। यह अलग-अलग सामाजिक और वैचारिक समूहों का गठजोड़ है। इसी वजह से न तो कोई केंद्रीय नेतृत्व है और न ही साफ चुनावी रणनीति। कुछ गुट चुनाव टालने के पक्ष में हैं, जबकि कुछ मानते हैं कि चुनाव लड़क ही बदलाव लाया जा सकता है।
केपी शर्मा ओली तीसरी बार बने पार्टी अध्यक्ष

इस असमंजस के बीच जेन-जी नेता काठमांडू के मेयर बालेन शाह, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता रवि लामिछाने और पूर्व बिजली प्राधिकरण प्रमुख कुलमान घिसिंग को साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, कई बैठकों के बावजूद अब तक किसी संयुक्त मोर्चे या साझा घोषणा पर सहमति नहीं बन सकी है।

राजनीतिक उथल-पुथल के बीच पुरानी पार्टियां भी आक्रामक हो गई हैं। केपी शर्मा ओली तीसरी बार सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष चुने गए हैं। वहीं पुष्पकमल दहल \“प्रचंड\“ ने कई वाम दलों को मिलाकर नई नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (NPC) बना ली है।

तीन महीने पहले प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने वित्त मंत्रालय की इमारत को नुकसान पहुंचाया था, जिसे अब नए रूप में तैयार किया गया है। यह घटनाक्रम हालिया आंदोलन की तीव्रता को दिखाता है। चुनाव से पहले नेपाल की राजनीति में अनिश्चितता, ध्रुवीकरण और शक्ति प्रदर्शन तीनों साथ-साथ चल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जेन-जी आंदोलन की दिशा और पुरानी पार्टियों की रणनीति तीनों मिलाकर आने वाले चुनाव का भविष्य तय करेंगे।
Gen Z और सरकार के बीच इन 5 मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं

  • संवैधानिक संशोधन- चुनाव से पहले संशोधन की कोई ठोस गारंटी नहीं
  • लिखित आश्वासन- सरकार या बड़ी पार्टियों से स्पष्ट लिखित वादा नहीं
  • भ्रष्टाचार जांच- आयोग बना है, लेकिन केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक से अब तक पूछताछ नहीं
  • हिंसा की जवाबदेही- आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की जांच की रफ्तार पर सवाल
  • चुनावी सुधार- समानुपातिक प्रतिनिधित्व और पारदर्शिता बढ़ाने की मांग


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