उमर खालिद और शरजील इमाम। जागरण
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली दंगा मामले में उमर खालिद और शरजील की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज कर दी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मिरान हैदर, शिफा उर रहमान सहित पांच को सशर्त जमानत दे दी है। आइए आपको बताएंगे कि उमर खालिद और शरजील पर क्या-क्या आरोप हैं।
पिछले पांच साल से जेल में बंद छात्र एक्टिविस्ट उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानक याचिका पर आज यानी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने सारी दलीलें सुनने के बाद उमर और शरजील की जमानत पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं कोर्ट ने एक साल तक के लिए याचिका दाखिल करने पर भी रोक लगा दी है।
कब से हिरासत में
राजधानी दिल्ली में 2020 में हुए दंगे की साजिश के आरोप में उमर खालिद और शरजील को हिरासत में लिया गया था। उमर खालिद को 13 सितंबर, 2020 को हिरासत में लिया गया, जबकि इमाम को 28 जनवरी, 2020 से जेल में रखा गया है।
दंगे में गई थी कई लोगों की जान
2020 के दंगे फरवरी में नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के कुछ हिस्सों में हुए थे। ये दंगे नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) के विरोध प्रदर्शनों को लेकर हफ्तों से चल रहे तनाव के बाद हुए थे। यह हिंसा कई दिनों तक चली, जिसमें कई लोगों की मौत हुई, साथ ही घरों, दुकानों और पूजा स्थलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।
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उमर और शरजील पर क्या-क्या लगे आरोप?
- दिल्ली पुलिस ने हिंसा की जांच की और इसे सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी एक साजिश बताया। कई एक्टिविस्ट, छात्र और बुद्धिजीवियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) जैसे कड़े कानूनों के तहत गिरफ्तार किया गया। इनमें जेएनयू के पूर्व छात्र शरजील इमाम और पहले के कैंपस आंदोलनों से जुड़े छात्र एक्टिविस्ट उमर खालिद शामिल थे।
- उमर और शरजील के भाषणों और गतिविधियों ने हिंसा की योजना बनाने और उसे बढ़ाने में योगदान दिया, इन दावों को दोनों ने खारिज किया है।
- शरजील इमाम को जेल भेजने के लिए कोर्ट की सुनवाई में सबूत के तौर पर एक वीडियो पेश किया गया, जिसमें वह चिकन नेक कॉरिडोर को ब्लॉक करने और असम को भारत से अलग करने के बारे में बात करते सुनाई पड़ता है।
- दिल्ली पुलिस ने एक और वीडियो का भी जिक्र किया है, जिसमें शरजील इमाम कथित तौर पर चक्का जाम करके दिल्ली को पंगु बनाने और दूध और सब्जियों जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई रोकने का प्लान बता रहा है।
- वहीं, 10 दिसंबर की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से बार-बार UAPA की धारा 15 के बारे में सवाल किया, जिसका इस्तेमाल प्रॉसिक्यूशन ने भाषणों और विरोध प्रदर्शन से जुड़ी गतिविधियों के लिए किया था।
- उमर खालिद की भूमिका पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने पिछली सुनवाई में खालिद के पिछले रिकॉर्ड का जिक्र किया था, जिसमें 2016 का एक विवादित जेएनयू विरोध प्रदर्शन भी शामिल था। आरोप लगाया था कि खालिद ने “भारत तेरे टुकड़े टुकड़े होंगे“ का नारा लगाया था।
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