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झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: साक्षरता में लंबी छलांग, लेकिन 39.7% छात्र प्राइवेट ट्यूशन के भरोसे

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प्रतीकात्मक तस्वीर



राज्य ब्यूरो, जागरण रांची। झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट-2025-26 के अनुसार, झारखंड में 39.7 प्रतिशत बच्चों को विषय की तैयारियों के लिए प्राइवेट कोचिंग का सहारा लेना पड़ता है। यह राष्ट्रीय औसत 12.7 प्रतिशत से काफी अधिक है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि झारखंड में प्राइवेट कोचिंग पर प्रति विद्यार्थी पूरे वर्ष में औसतन 2,220 रुपये खर्च करते हैं। हालांकि झारखंड में प्राइवेट कोचिंग पर होने वाला खर्च राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।

पूरे देश की बात करें तो मौजूदा शैक्षणिक सत्र के दौरान प्राइवेट कोचिंग पर प्रति छात्र अनुमानित औसत व्यय 2,409 रुपये है। रिपोर्ट में यह भी तथ्य सामने आया है कि जैसे-जैसे विद्यार्थी ऊपरी कक्षाओं में जाते हैं, उनमें प्राइवेट कोचिंग पर निर्भरता बढ़ती जाती है। यह स्थिति 10वीं तक रहती है।

रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात 2016-17 में 15.9 था जो वर्ष 2023-24 में 20 प्रतिशत हो गया। हालांकि राष्ट्रीय औसत 28.4 प्रतिशत के साथ 8.4 प्रतिशत का अंतर अभी भी बना हुआ है। रिपोर्ट में शिक्षा-रोजगार गठजोड़ महिलाओं के लिए विरोधाभास की बात कही गई है।

रिपोर्ट में साक्षरता दर के संबंध में कहा गया है कि झारखंड की साक्षरता दर 2023-24 में 76.70 प्रतिशत तक पहुंच गई जो राज्य के गठन के समय महज 53.56 प्रतिशत थी। हालांकि राष्ट्रीय औसत 80.9 प्रतिशत के साथ 4.2 प्रतिशत का अंतर अभी भी बना हुआ है।

अच्छी बात यह है कि महिला साक्षरता में पुरुषों की तुलना में लगभग पांच गुना तेजी से सुधार हुआ है तथा लैंगिक समानता सूचकांक 0.79 से बढ़कर 0.85 हो गया है। इस अवधि में ग्रामीण-शहरी साक्ष्ररता अंतर 15.9 प्रतिशत से घटकर 12.3 प्रतिशत हो गया है।

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