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गुरुग्राम में कई शराब डिस्ट्रीब्यूटर कागजों पर चला रहे वेयरहाउस, बिना कस्टम ड्यूटी ठेकों पर जा रही मदिरा

LHC0088 2025-12-15 19:37:16 views 1027
  

सिग्नेचर टावर के पास स्थित इसी शराब ठेके पर छापेमारी में मिली थी विदेशी शराब। जागरण आर्काइव



विनय त्रिवेदी, गुरुग्राम। कस्टम ड्यूटी चोरी करने में सिर्फ शराब ठेकेदार ही शामिल नहीं हैं, इसमें कई डिस्ट्रीब्यूटरों की भी मिलीभगत है। सूत्रों के अनुसार डिस्ट्रीब्यूटर पोर्ट से शराब की पेटियां मंगवाते हैं और इन्हें अपने दूसरे वेयर हाउस में ट्रांसफर करने की जानकारी कस्टम विभाग को देकर सीधे ठेकों पर ही अवैध रूप से भेज देते हैं। चूंकि वेयर हाउस में रखे होने पर इनकी कस्टम ड्यूटी नहीं चुकानी पड़ती और ठेकों पर बिना बिलिंग के ही सस्ते में ऐसी शराब बेच दी जाती है। कुछ इसी तरीके से द ठेका वाइन शाप पर सस्ते में शराब बेची जा रही थी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

आबकारी विभाग की टीम ने मंगलवार रात सिग्नेचर टावर चौक के नजदीक द ठेका नाम से संचालित शराब ठेके में छापेमारी कर लगभग 90 लाख रुपये की एक्साइज ड्यूटी की चोरी का भंडाफोड़ किया था। ठेके से छापेमारी के दौरान कुल 47,220 विदेशी शराब की बोतलें बरामद की गईं थी। जिस शराब की बाेतलों को बरामद किया गया, उन पर होलोग्राम और ट्रैक-ट्रेस स्ट्रिप्स नहीं थी।

कुछ शराब ठेकोदारों ने इसकी प्रक्रिया के बारे में बताया कि डिस्ट्रीब्यूटरों के गोदाम हर शहर में होते हैं। इनका रजिस्ट्रेशन कस्टम विभाग से कराना पड़ता है। जब तक इन गोदामों या वेयरहाउस में शराब की पेटियां रखी रहती हैं तब तक इनकी कस्टम ड्यूटी चुकानी नहीं पड़ती। क्योंकि विदेशी शराब जहाज के रास्ते देश में आती है, इसलिए कस्टम ड्यूटी देनी पड़ती है। इसे भरने के लिए 90 दिन का समय भी होता है।

ऐसे में यह खेल इस तरह से होता है कि डिस्ट्रीब्यूटर कस्टम विभाग को जानकारी देते हैं कि उन्होंने अपने एक वेयरहाउस से दूसरे वेयरहाउस में माल भेजा है, लेकिन वह वेयरहाउस कागजों में ही होता है। वह शराब वेयरहाउस में न जाकर सीधा ठेके पर पहुंच जाती है। ऐसे में राज्य सरकार के नियमों को दरकिनार किया जाता है। इसमें न तो ठेकेदारों को कस्टम ड्यूटी चुकानी पड़ती है और न ही एक्साइज टैक्स। शराब की बोतल पर इन टैक्स के न लगे होने से ठेकेदार बिना बिल के ही मनमाने रेट पर इसे बेच देते हैं।
नारनौल में भी एक महीने पहले द ठेके पर हुई थी छापेमारी

मंगलवार रात गुरुग्राम के जिस ठेके पर छापेमारी की गई, वह ठेका मेसर्स सुरेंद्र के नाम पर है। इसके लिए सरकार को 44 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस जमा की गई थी। इसके मालिक अंकुश गोयल व दो अन्य लोग भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार दो साल पहले नारनौल के रहने वाले अंकुश गोयल ने दो अन्य ठेकेदारों के साथ मिलकर द ठेका फर्म बनाई। नारनौल शहर में इस नाम के चार ठेके हैं।

नारनौल के अलावा महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम व राजस्थान में अलग-अलग पार्टनरों के साथ अंकुश ने शराब के ठेके लिए हुए हैं।करीब एक महीने पहले नारनौल में इसके ठेके पर सस्ती शराब बेचे जाने की सूचना पर भिवानी की आबकारी विभाग की टीम ने सिंघाना रोड स्थित ठेके पर छापेमारी कर दो दिन के लिए बंद कर दिया था। इस दौरान भी जांच में सामने आया था कि कस्टम ड्यूटी चोरी करके विदेशी शराब सस्ते में बेची जा रही है।
टैक्स के साथ दो हजार तो बिना टैक्स के 12 सौ में बेची जा रही शराब की बोतल

एक शराब ठेकेदार के मुताबिक अवैध तरीके से लाई गई विदेशी सस्ते में ठेकों पर बेची जाती है। इसे इस तरीके से समझा जा सकता है कि रेड लेबल शराब की एक बोतल कस्टम और एक्साइज ड्यूटी के साथ कम से कम दो हजार से 2200 रुपये की होती है। लेकिन, अवैध तरीके से लाई गई बोतल 1200 से 1400 तक में आसानी से मिल जाती है। इस बोतल की फैक्ट्री में कीमत करीब 600 रुपये होती है। शराब ठेकेदार कम रेट पर बोतल बेचकर बाकी वैध ठेकों का बिजनेस चौपट कर देते थे।
ठेका मालिक पर पहले से भी कई केस दर्ज

गुरुग्राम पुलिस के मुताबिक वाइन शाप से विदेशी शराब के पकड़े जाने के मामले में अब तक मैनेजर और ठेका मालिक अंकुश गोयल को पकड़ा जा चुका है। वह नारनौल का रहने वाला है। परिवार कभी परचून की दुकान चलाता था, फिर जूतों की दुकान खोली।

इसी दौरान अवैध रूप से शराब बेचने के भी आरोप लगे। कुछ साल पहले अंकुश खुलकर शराब के धंधे में आ गया। सूत्रों के अनुसार इस शराब कारोबारी पर पहले से छह केस दर्ज हैं। जिनमें से पांच एक्साइज एक्ट के हैं। दो साल पहले इसके घर पर एनआइए की रेड भी हुई थी।
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