प्रयागराज में मंडलीय शाकभाजी, फल एवं पुष्प प्रदर्शनी में गमले में लगा \“वटवृक्ष\“ लोगों में कौतूहल का विषय बना है। जागरण
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। आधी सदी की उम्र के वटवृक्ष की बात हो तो आंखों के सामने भारी भरकम पेड़ की तस्वीर आ जाएगी, जिसकी ऊंचाई भी नापना शायद कठिन हो। हालांकि मंडलीय शाकभाजी, फल एवं पुष्प प्रदर्शनी में इतनी ही आयु का एक ऐसा वटवृक्ष आया है, जिसे आप बड़ी आसानी से उठाकर कहीं भी ले जा सकते हैं। यह भी 50 बसंत देख चुका है। उड़ीसा के रहने वाले शरद ने एक फीट चौड़े और पांच से छह इंच गहरे मिट्टी के गमले में इसे तैयार किया है। इसकी कीमत वह करीब 50 हजार बता रहे हैं।
यह तो बोनसाई पौधा है
वटवृक्ष की यह न कोई नई प्रजाति नही, बल्कि बोनसाई पौधा हैं। शरद अलग-अलग प्रजातियों के 27 अन्य बोनसाई पौधे भी प्रदर्शनी में सिर्फ शो के लिए लेकर आए हैं। इनमें 30 साल का एनेडियम, 30 साल का ही जेट प्लांट और 35 साल के पाकर समेत अन्य पौधे शामिल है। इनकी कीमत भी 25 हजार से लेकर 35 हजार रुपये तक है।
प्रयागराज में रहकर शरद बना रहे बोनसाई
शरद करीब 40 वर्षों से बोनसाई बना रहे हैं। पिछले करीब 30 वर्ष से वह प्रयागराज के कटरा में रितू यादव के यहां माली की नौकरी कर रहे हैं। शरद बताते हैं कि किसी भी पौधे को बोनसाई बनाया जा सकता है, लेकिन यह इतना आसान नहीं। इस कला में अनुभव के साथ धैर्य का बड़ा महत्व बताया। क्योंकि, एक-एक पौधे को तैयार करने में वर्षों लग जाते हैं। राजकीय उद्यान अधीक्षक जगदीश प्रसाद ने बताया कि प्रदर्शनी में लगा बोनसाई का स्टाल लोगों में आकर्षण का केंद्र बना है। लोग इनके बारे में जान रहे हैं और बनाने का तारीका सीखने की इच्छा जता रहे हैं।
ऐसे बनाते हैं बोनसाई
बोनसाई बनाने के लिए पौधों को छोटे से छोटे गमले में लगाया जाता है। दूसरे पौधों के सापेक्ष इन्हें खाद, पानी और अन्य पोषक तत्व सीमित दिए जाते हैं। ताकि, पौधे जीवित भर रहें। इनकी मिट्टी तैयार करने और पौधों को विशेष आकार देने की भूमिका अहम रहती है।
कैसे तैयार होती है बोनसाई की मिट्टी?
शरद बताते हैं कि बोनसाई के लिए 20 किलोग्राम मिट्टी तैयार करने में 10 किलोग्राम मिट्टी, दो किलोग्राम गोबर की खाद, दो किलोग्राम बोन पाउडर, एक किलोग्राम डीएपी, आधा किलो फोरेट 10 एमजी, दो किलोग्राम सेरा मिल और तीन किलोग्राम ओसोट मिलाते हैं।
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