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नेपाल से दिल्ली तक फैला था जाल; झारसुगुड़ा पुलिस ने दबोचे 7 साइबर ठग, विदेशी सिम कार्ड और पासपोर्ट बरामद

deltin33 1 hour(s) ago views 133
  

पुलिस द्वारा जब्‍त मोबाइल ,एटीएम कार्ड ,लैपटाप व पासबुक।


जागरण संस, झारसुगुड़ा। ओडिशा की झारसुगुड़ा पुलिस ने साइबर कवच ऑपरेशन के तहत बड़े अंतरराज्यीय साइबर अपराध सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह फर्जी बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी (USDT) के माध्यम से करोड़ों रुपये की हेराफेरी कर रहा था।    पुलिस ने इस मामले में गिरोह के 7 सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जो डिजिटल मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए अवैध धन को ठिकाने लगाते थे।  
14 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन एसपी गुंडला रेड्डी राघवेंद्र ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि जांच में अब तक 14 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के सबूत मिले हैं। गिरोह का मुख्य संचालन उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से किया जा रहा था।    चौंकाने वाली बात यह है कि गिरोह के तार दिल्ली और गाजियाबाद के साथ-साथ नेपाल से भी जुड़े हुए थे। गिरोह मासूम लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनमें ठगी की रकम मंगवाता था और बाद में उस राशि को \“पीपी करिया\“ जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल करेंसी (USDT) में बदल देता था।  
स्थानीय लोगों को बनाया मोहरा

जांच में खुलासा हुआ कि लैयकरा पुलिस स्टेशन के अंतर्गत पनपाली गांव के करुणाकर सिंह उर्फ बौन और स्कूल वित्त सुधार कर्मचारी थियो दरवान उर्फ दिलू इस खेल के मुख्य किरदार थे। इन लोगों ने स्थानीय ग्रामीणों को प्रलोभन देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए और बाद में उन खातों के एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और पासबुक को अपने कब्जे में ले लिया।  
गिरफ्तार आरोपी और बरामदगी

पुलिस ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर निवासी हिमांशु कुमार श्रीवास्तव सहित परमानंद दास (38), बिछैया (37), तनोज प्रधान (40), केदार प्रधान (40) और मुंडा (30) को गिरफ्तार किया है।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने निम्नलिखित सामग्री जब्त की है:

  •     लैपटॉप और मोबाइल फोन  
  •     श्रीलंका और थाईलैंड के अंतरराष्ट्रीय सिम कार्ड
  •     बड़ी संख्या में एटीएम/डेबिट कार्ड और बैंक पासबुक
  •     भारतीय पासपोर्ट, पैन कार्ड और आधार कार्ड
  •     बैंक कर्मचारी का फर्जी पहचान पत्र  

कमीशन के आधार पर काम करता था गिरोह एसपी ने बताया कि यह गिरोह कमीशन के आधार पर काम करता था। कई खाताधारकों को कमीशन का भुगतान करने के लिए दिल्ली और नेपाल तक ले जाया गया था।    पुलिस अब इस सिंडिकेट के मुख्य आयोजकों और तकनीकी विशेषज्ञों की तलाश कर रही है जो इस पूरे मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को डिजिटल रूप से नियंत्रित कर रहे थे।  

झारसुगुड़ा पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता न खोलें और न ही अपने पहचान पत्र (आधार/पैन) किसी को सौंपें, क्योंकि इनका उपयोग अवैध गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
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