शताब्दीनगर स्टेशन पर 1857 की शौर्य गाथा को पेटिंग के माध्यम से दर्शाया गया। सौ. एनसीआरटीसी
जागरण संवाददाता, मेरठ। नमो भारत अब केवल तेज और आधुनिक परिवहन सेवाभर नहीं रहा, बल्कि यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मेरठ की ऐतिहासिक पहचान का जीवंत मंच बन रहा है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) द्वारा विभिन्न नमो भारत स्टेशनों की दीवारों को स्थानीय कला, इतिहास और परंपराओं पर आधारित आकर्षक कलाकृतियों से सजाया गया है। इन पेंटिंग्स के माध्यम से मेरठ की खेल नगरी की पहचान, पारंपरिक वाद्ययंत्र निर्माण की विरासत, 1857 की क्रांति की गौरवगाथा और सैनिकों के शौर्य को उकेरा गया। स्टेशन अब यात्रियों के लिए केवल आवागमन का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कृति, इतिहास और गौरव से रूबरू कराने वाला जीवंत सामाजिक स्थल भी बन गया है।
एनसीआरटीसी द्वारा इन स्टेशनों की दीवारों पर बनाई जा रही थीम आधारित कलाकृतियां स्थानीय पहचान को राष्ट्रीय मंच प्रदान कर रही हैं। मेरठ सेंट्रल स्टेशन पर शहर की खेल उद्योग में वैश्विक पहचान को दर्शाया गया है। क्रिकेट बैट, हाकी स्टिक, बाक्सिंग ग्लब्स और अन्य खेल उपकरणों की पेंटिंग्स मेरठ को भारत की खेल राजधानी के रूप में दर्शाती है।
विश्वस्तरीय क्रिकेट बैट निर्माण के लिए प्रसिद्ध मेरठ शहर दशकों से अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का भरोसा रहा है। भैंसाली स्टेशन पर पारंपरिक वाद्ययंत्र निर्माण की कला को प्रमुखता दी गई है। खासतौर पर मेरठ के बिगुल को मिले जीआई टैग को दर्शाया गया है। जली कोठी क्षेत्र में एक सदी से अधिक समय से ब्रास बैंड वाद्ययंत्रों का निर्माण होता आ रहा है, जो शहर की सांगीतिक विरासत का प्रतीक है।
शताब्दी नगर स्टेशन पर आबूलेन की प्रसिद्ध चाट, खेल उद्योग और 1857 की क्रांति की झलक दिखाई गई है। मेरठ की धरती से फूटी प्रथम स्वतंत्रता क्रांति की स्मृतियां इन कलाकृतियों में सजीव हैं। वहीं बेगमपुल और एमईएस स्टेशनों के लिए भी सांस्कृतिक व ऐतिहासिक थीम पर आर्टवर्क प्रस्तावित हैं, जिनमें आध्यात्मिक विरासत, 1857 की क्रांति और भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य को दर्शाया जाएगा। |