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कौन हैं हिरोद पटेल? PM मोदी ने मन की बात में किया जिक्र, खेती में नवाचार से करते हैं सलाना 12 लाख की कमाई

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शेषनाथ राय, भुवनेश्वर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात में ओडिशा के युवा किसान हिरोद पटेल की खुले दिल से प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने हिरोद की किसानी की कार्यशैली, नवाचार और बहुआयामी खेती को ग्रामीण भारत के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

हिरोद पटेल ओडिशा के सुंदरगढ़ जिला के रहने वाले हैं। उन्होंने खेती की शुरुआत अपने पिता से मिली सीख और परंपरागत ज्ञान से की, लेकिन उसे आधुनिक सोच और मेहनत से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। हिरोद धान, केला और मछली, तीनों की एकीकृत खेती करते हैं, जिससे उनकी आमदनी के कई स्रोत बने हैं और जोखिम भी कम हुआ है।

प्रधानमंत्री ने मन की बात में उल्लेख किया कि कैसे युवा किसान पारंपरिक खेती के साथ नवाचार जोड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं, बल्कि गांवों में रोजगार और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दे रहे हैं।

हिरोद पटेल की कहानी इसी बदलाव का उदाहरण है, जहां मेहनत, सीखने की ललक और नई तकनीकों का सही उपयोग दिखाई देता है। आज हिरोद पटेल की सफलता की चर्चा सिर्फ उनके गांव या जिले तक सीमित नहीं रही।

मन की बात में उनका जिक्र होने से ओडिशा के किसानों में उत्साह है और देशभर के युवाओं को खेती को एक सम्मानजनक और लाभकारी पेशे के रूप में अपनाने की प्रेरणा मिली है।
नवाचार के लिए जाने जाते हैं हिरोद

गौरतलब है कि जब देश के युवा खेती से दूरी बना रहे हैं, ऐसे समय में ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के एक युवा किसान ने खेती को ही अपनी पहचान और सफलता का जरिया बना लिया है। 32 वर्षीय हिरोद पटेल ने आधुनिक सोच और नवाचार के दम पर न केवल अपनी आमदनी बढ़ाई, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बनकर उभरे हैं।

रतनपुर गांव (तांगरपाली ब्लॉक) के रहने वाले हिरोद पटेल मूल रूप से ITI प्रशिक्षित तकनीशियन हैं। शुरुआती दौर में उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने की कोशिश की, लेकिन अंततः खेती की ओर लौट आए।

कृषक परिवार से होने के कारण खेती से उनका जुड़ाव पहले से ही था। चार वर्ष पहले उन्होंने प्रयोग के तौर पर खेती शुरू की, जो आज एक सफल मॉडल बन चुकी है।

करीब 14 एकड़ भूमि पर हिरोद पटेल ने एकीकृत खेती प्रणाली को अपनाया है। वे धान की खेती के साथ-साथ बागवानी, फूलों की खेती और खेत-तालाबों में मछली पालन कर रहे हैं। खास बात यह है कि उन्होंने खेत तालाबों की मेड़ों का भी रचनात्मक उपयोग किया।
तालाब में मछली पालन और सब्जी की खेती साथ-साथ

पटेल ने तालाब की मेड़ों पर लौकी जैसी बेलदार फसलें लगाईं और तालाब के ऊपर जीआई तारों से ट्रेलिस सिस्टम तैयार किया, जिससे बेलें आसानी से फैल सकें। इस प्रयोग से उन्हें पहली ही फसल में करीब 30 हजार रुपये की अतिरिक्त आय हुई।

मछली पालन भी उनकी आय का मजबूत स्रोत बन गया है। कृषि विभाग के मृदा संरक्षण एवं जलग्रहण विकास प्रकोष्ठ की सहायता से खोदे गए दो तालाबों से उन्हें सालाना लगभग 80 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।
12 लाख पहुंचा सलाना टर्नओवर

उन्होंने बताया कि जिन निचली जमीनों में बरसात के दौरान पानी भर जाता था और खेती संभव नहीं थी, उन्हीं का उपयोग उन्होंने मछली पालन के लिए किया।

इसके अलावा उनके खेत में नारियल, केला, बेर, अमरूद और आम जैसे फलदार पौधे भी लगाए गए हैं, जो तेजी से विकसित हो रहे हैं और आने वाले समय में अच्छी आमदनी देने की उम्मीद है।

हिरोद पटेल का कहना है कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ नवाचार और संसाधनों का सही उपयोग करें, तो खेती भी एक लाभकारी व्यवसाय बन सकती है। आज उनका सालाना टर्नओवर 10 से 12 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। खेत तालाबों से शुरू हुआ यह प्रयोग अब क्षेत्र के किसानों के लिए सफलता का मॉडल बनता जा रहा है।

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