स्टर्लिंग सिल्वर बनाम शुद्ध चांदी: जानें 925 और 999 में क्या है अंतर और कौन है आपके लिए बेहतर
नई दिल्ली| सिल्वर यानी चांदी, ये सिर्फ गहनों की चमक नहीं, बल्कि इतिहास, निवेश (silver investment) और रोजमर्रा की उपयोगिता से जुड़ी धातु है। लेकिन जब बाजार में \“925 स्टर्लिंग सिल्वर\“ लिखा दिखता है, तो सवाल उठता है कि ये शुद्ध चांदी से अलग कैसे है और कीमत में फर्क क्यों है?
दरअसल, स्टर्लिंग सिल्वर (Sterling Silver) असल में 92.5% शुद्ध चांदी और 7.5% दूसरे धातुओं (अधिकतर तांबा) का मिश्रण होता है। इसी कारण इसे \“925\“ स्टैम्प से पहचाना जाता है। वहीं फाइन सिल्वर (Fine Silver) या शुद्ध चांदी 99.9% सिल्वर होती है और उस पर आमतौर पर \“999\“ लिखा होता है।
दोनों में फर्क क्या है?
शुद्ध चांदी बहुत मुलायम होती है। यह आसानी से मुड़ सकती है, खरोंच आ सकती है और रोज पहनने वाले गहनों के लिए उतनी मजबूत नहीं मानी जाती। इसलिए नेकलेस, अंगूठी या कंगन जैसे रोजाना इस्तेमाल वाले गहनों में स्टर्लिंग सिल्वर को ज्यादा पसंद किया जाता है। तांबे की मिलावट इसे मजबूत और टिकाऊ बनाती है।
कीमत की बात करें तो बाजार में शुद्ध चांदी का भाव थोड़ा ज्यादा रहता है, क्योंकि उसमें मिलावट नहीं होती। हालांकि गहनों की कीमत सिर्फ धातु पर नहीं, बल्कि डिजाइन, ब्रांड और मेकिंग चार्ज पर भी निर्भर करती है।
आम तौर पर स्टर्लिंग सिल्वर ज्वैलरी सोने के मुकाबले काफी सस्ती होती है, इसलिए मिडिल क्लास और युवा वर्ग में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है।
7 प्राचीन धातुओं में शामिल है चांदी
इतिहास की बात करें तो चांदी दुनिया की सात प्राचीन धातुओं में शामिल है- सोना, तांबा, टिन, सीसा, लोहा और पारा के साथ। पुराने समय में इसे हासिल करना मुश्किल था, इसलिए इसकी कीमत ज्यादा थी। आज तकनीक बेहतर होने से चांदी सोने से सस्ती है, लेकिन इसकी औद्योगिक मांग इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और मेडिकल उपकरणों में लगातार बढ़ रही है।
क्या स्टर्लिंग सिल्वर काला पड़ता है? हां, हवा में मौजूद सल्फर से प्रतिक्रिया के कारण इस पर काला दाग (टार्निश) आ सकता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि इसे कपड़े या हल्के साबुन से साफ किया जा सकता है।
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आपके लिए क्या सबसे बेस्ट?
अगर आप रोज पहनने के लिए मजबूत, चमकदार और किफायती गहना चाहते हैं तो 925 स्टर्लिंग सिल्वर बेहतर विकल्प है। वहीं शुद्ध चांदी ज्यादा शुद्धता के लिए जानी जाती है, लेकिन उपयोग में थोड़ी नाज़ुक होती है। अब जब अगली बार आप चांदी खरीदें, तो \“925\“ और \“999\“ का फर्क समझकर ही फैसला लें। |