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सेहरी और सेहत : रमजान में दिनभर ऊर्जावान रहने के लिए क्या खाएं और किन चीजों से बचें?

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जागरण संवाद सहयोगी, चाईबासा । इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र महीने रमजान की शुरुआत के साथ ही फिजाओं में इबादत की खुशबू घुल गई है। रमजान का महीना रहमतों और बरकतों का माना जाता है, जिसमें मुसलमान अल्लाह के हुक्म से अपने एक अहम फर्ज (रोजा) को पूरा करते हैं।    चाईबासा की बड़ी बाजार जामा मस्जिद के इमाम ताहा हुसैन कासमी ने इस पवित्र महीने और \“सेहरी\“ की अहमियत पर विशेष जानकारी साझा की है।  
सेहरी: इबादत की मजबूती और सुन्नत का पालन

इमाम ताहा हुसैन कासमी के अनुसार, रमजान में रोजा रखने के लिए सुबह तड़के (करीब 4 बजे) किया जाने वाला भोजन \“सेहरी\“ कहलाता है। उन्होंने बताया कि सेहरी करना अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत है। उन्‍होने कहा क‍ि सेहरी केवल शारीरिक भूख मिटाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह इबादत का एक अनिवार्य हिस्सा है। यह रोजे के इरादे (नियत) को मजबूती प्रदान करती है।    अल्लाह के रसूल से पहले की कौमें भी रोजा रखती थीं, लेकिन वे सेहरी नहीं करती थीं। इसलिए इस्लाम में सेहरी को रोजेदारों के लिए खास पहचान और बरकत का जरिया बनाया गया है।  
दुआओं की कबूलियत का वक्त धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सेहरी का समय बहुत मुकद्दस (पवित्र) होता है। इस वक्त की गई दुआओं की कबूलियत की खास अहमियत है।   इमाम ने कहा कि अगर किसी ने सच्चे दिल से रोजे की न‍ियत कर ली है, तो उसका रोजा मुकम्मल माना जाता है, लेकिन सुन्नत का पालन करते हुए सेहरी करना अफजल है।  
सेहत और खान-पान: इमाम की सलाह

दिन भर की भूख-प्यास (सुबह 4 बजे से शाम 6 बजे इफ्तार तक) को सहन करने और शरीर को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए इमाम ने खान-पान पर भी विशेष सुझाव दिए हैं:

  •     क्या खाएं: सेहरी में सबसे उत्तम आहार खजूर और दूध है। यह ब्लड शुगर के स्तर को स्थिर रखता है और दिन भर कमजोरी महसूस नहीं होने देता।  
  •     किनसे बचें: तेल, मसालेदार और तला-भुना खाना खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे दिन भर प्यास अधिक लगती है और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।  
  •     हल्का भोजन: इबादत में मन लगा रहे, इसके लिए हल्का और सुपाच्य भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।  

सामाजिक और आध्यात्मिक संदेश रमजान का महीना हमें धैर्य, आत्म-अनुशासन और दूसरों के प्रति सहानुभूति सिखाता है। सुबह की सेहरी से लेकर शाम की इफ्तार तक, एक रोजेदार न केवल अन्न-जल का त्याग करता है, बल्कि अपनी बुराइयों को भी छोड़ने का संकल्प लेता है।    चाईबासा सहित पूरे क्षेत्र में रमजान को लेकर उत्साह है और मस्जिदों में विशेष नमाज (तरावही) का दौर जारी है। यह काफी पवित्र महिना माना गया है।
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