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अमेरिकी सांसद बोले भारत पर बेतुके टैरिफ लगाने के बहाने ढूंढ रहे ट्रंप (फोटो- रॉयटर)
पीटीआई, न्यूयॉर्क। अमेरिका के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर अत्यधिक टैरिफ लगाने के बहाने ढूंढ रहे हैं। उन्होंने ट्रंप से इस नीति को तुरंत बदलने का आग्रह किया है।
सदन की विदेश मामलों की समिति और वित्तीय सेवा समिति के वरिष्ठ सदस्य शेरमैन ने कहा कि ट्रंप का दावा है कि भारत पर टैरिफ रूसी तेल आयात से संबंधित हैं, लेकिन हंगरी अपने कच्चे तेल का 90 प्रतिशत रूस से बिना किसी टैरिफ के आयात करता है।
साथ ही रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार चीन रूसी तेल खरीदने से संबंधित प्रतिबंधों से प्रभावित नहीं हुआ है। उसपर अन्य कारणों से प्रतिबंध लगाए गए हैं।
शेरमैन ने कहा, \“\“भारत को रूस से केवल 21 प्रतिशत कच्चा तेल मिलता है, लेकिन हमारे सहयोगी देश को निशाना बनाया जा रहा है। राष्ट्रपति को इस नीति को तुरंत बदलना चाहिए।\“\“
इस महीने की शुरुआत में अमेरिका और भारत ने व्यापार पर एक अंतरिम समझौते के लिए रूपरेखा तैयार करने की घोषणा की थी। ट्रंप ने कार्यकारी आदेश जारी कर रूसी तेल की खरीद पर भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क को हटा दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने मास्को से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ऊर्जा आयात बंद करने और अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों की खरीद के लिए नई दिल्ली की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। व्यापार समझौते के तहत वाशिंगटन नई दिल्ली पर कम पारस्परिक शुल्क लगाएगा, जो 25 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो जाएगा।
ट्रंप की सामूहिक हिरासत नीति का समर्थन करने वाले बोर्ड के फैसले को कोर्ट ने किया खारिज
कोर्ट ने गुरुवार को प्रशासनिक बोर्ड के फैसले को खारिज कर दिया। दरअसल, बोर्ड ने ट्रंप प्रशासन की उस नीति का समर्थन किया था, जिसके तहत इमिग्रेशन अभियान के दौरान गिरफ्तार हजारों लोगों को जमानत पर रिहा होने का मौका दिए बिना अनिवार्य हिरासत में रखा गया था।
कैलिफोर्निया के अमेरिकी जिला न्यायाधीश सनशाइन साइक्स ने इमिग्रेशन अपील बोर्ड के इस फैसले को रद कर दिया, क्योंकि उन्होंने पाया कि प्रशासन उनके द्वारा पहले जारी किए गए उस आदेश का पालन करने में विफल रहा था जिसमें उन्होंने इस नीति को गैरकानूनी घोषित किया था।
पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा नियुक्त साइक्स ने प्रशासन की इस कार्रवाई को शर्मनाक करार दिया और कहा कि उनके फैसले के बाद भी जमानत सुनवाई से इनकार करके वे अवैध कार्रवाई का अपना अभियान जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रतिवादियों ने संवैधानिक आचरण की सीमाओं को पार कर दिया है।\“\“ अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग और अमेरिकी न्याय विभाग, जो बोर्ड की देखरेख करता है, ने टिप्पणी के अनुरोध पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। |
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