चाईबासा में विक्रेता का इंतजार करते फल दुकानदार।
जागरण संवाददाता, चाईबासा। बरकतों और रहमतों का मुकद्दस महीना रमजान गुरुवार से शुरू हो गया है। पहले रोजे के साथ ही मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इबादत, तरावीह और कुरान-ए-पाक की तिलावत के पाक सिलसिले का आगाज कर दिया है। शहर की मस्जिदों और घरों में इबादत का माहौल है। लेकिन इस बार रमजान की खुशियों के बीच बढ़ती महंगाई ने रोजेदारों की चिंता बढ़ा दी है।
इबादत और आत्मसंयम का दौर
रमजान के दौरान रोजेदार सुबह सादिक (सेहरी) से लेकर सूरज ढलने (इफ्तार) तक बिना अन्न-जल के रहकर खुदा की इबादत करते हैं। पांचों वक्त की नमाज के साथ विशेष दुआओं का दौर जारी है। रोजे का मकसद न केवल भूखा-प्यासा रहना है, बल्कि आत्मसंयम और जरूरतमंदों की मदद करना भी है।
इफ्तार की थाली पर महंगाई की मार
इफ्तार के समय शरीर में ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने के लिए फलों, खजूर और शरबत का विशेष उपयोग किया जाता है। हालांकि, इस बार बाजार का रुख काफी सख्त है। जनवरी-फरवरी में जो फल सस्ते थे, मार्च की शुरुआत और रमजान की मांग के चलते उनके दाम आसमान छू रहे हैं।
बड़ी बाजार के फल विक्रेता अब्दुल करीम के अनुसार, मंडी से ही फलों की कीमतें बढ़ाकर भेजी जा रही हैं। गर्मी का मौसम शुरू होने से पहले ही फलों के दाम पीक सीजन जैसे हो गए हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
खजूर के दामों में भारी अंतर
बाजार में खजूर की वैरायटी के अनुसार कीमतें 200 रुपये से लेकर 2000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। रोजा खोलने के लिए सुन्नत माने जाने वाले खजूर की मांग सबसे अधिक है।
बाजार में फलों के वर्तमान भाव (प्रति किलो):
फल का नाम कीमत (रुपये में)
- सेब 200 से 280
- खजूर 200 से 2000
- अंगूर 200 से 240
- अनार/चीकू 200 से 220
- तरबूज 120
- संतरा/पपीता 80 से 90
- केला (दर्जन) 60 से 80
- नारियल डाब 70 (प्रति पीस)
महंगाई के बावजूद रोजेदारों के उत्साह में कोई कमी नहीं है। बाजारों में शाम के समय इफ्तार की खरीदारी के लिए रौनक देखी जा रही है। लोग अपनी सामर्थ्य अनुसार खरीदारी कर इस पाक महीने की परंपराओं को निभा रहे हैं। |
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