राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के दो दिवसीय लखनऊ प्रवास के दौरान प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई। प्रवास के अंतिम चरण में गुरुवार सुबह उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक ने उनसे अलग-अलग मुलाकात की।
इससे पहले बुधवार शाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी संघ प्रमुख से भेंट कर करीब 40 मिनट तक चर्चा की थी।निराला नगर स्थित संघ कार्यालय सरस्वती कुंज में हुई इन बैठकों को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व की सिलसिलेवार मुलाकातों ने राजनीतिक हलकों में कई संकेत दिए हैं।
बैठकों में सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय, जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी पहुंच और आगामी राजनीतिक रणनीति पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। विकास कार्यों की प्रगति, निवेश प्रस्तावों और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी चर्चा की जानकारी मिली है। अवैध रोहिंग्या प्रवासियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई का मुद्दा भी बैठक में उठा। बताया जा रहा है कि आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के प्रति सरकार के सख्त रुख पर संघ नेतृत्व ने संतोष जताया।
औद्योगिक विकास, विशेष निवेश क्षेत्र की अवधारणा और प्रदेश को निवेश के लिए आकर्षक बनाने की रणनीति पर भी विचार हुआ। संगठनात्मक स्तर पर बूथ और घर-घर संपर्क अभियान को और प्रभावी बनाने पर जोर दिए जाने की बात सामने आई है। बुधवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में भागवत ने सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए कहा था कि छुआछूत जैसी कुरीतियों का आधुनिक समाज में कोई स्थान नहीं है।
विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में संगठन की बूथ स्तर की सक्रियता चुनावी सफलता में अहम भूमिका निभाती रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री और दोनों उप मुख्यमंत्रियों की संघ प्रमुख से अलग-अलग मुलाकातों को आगामी चुनावी परिदृश्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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