मुख्य आरोपित अब्दुल मलिक की जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा कांड के मुख्य आरोपित अब्दुल मलिक की जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की। बुधवार को वरिष्ठ न्यायाधीश न्युन मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ में सुनवाई पर कोर्ट इस मामले गंभीर मानते हुए दूसरी खंडपीठ को भेज दिया। अब मुख्य न्यायाधीश इस मामले को सुनने के लिए रजिस्ट्री को निर्देश देंगे कि किस खंडपीठ में सुनवाई होगी, उनके निर्णय पर निर्भर होगा।
पूर्व में कोर्ट ने सह अभियुक्त मोकिन सैफी जियाउर्रहमान व रईस अहमद की जमानत मंजूर की जबकि मुख्य आरोपित को कोई जमानत नहीं दी।सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की तरफ से कहा गया कि जिस दिन आगजनी हुई थी, उस समय मौजूद नही थे। सवाल उठाया कि जब घटना में शामिल नहीं थे तो पुलिस ने किस आधार पर मुकदमा दर्ज किया। कोर्ट ने अन्य को जमानत पर रिहा कर दिया गया है, उसी के आधार पर उन्हें भी जमानत दी जाए।
कोर्ट ने उनके मुकदमे को सुनने से इन्कार करते हुए अन्य पीठ को सुनवाई के लिए रेफर कर दिया है। अब्दुल मलिक सहित अन्य के विरुद्ध बनभूलपुरा दंगा मामले में चार मुकदमे दर्ज हुए थे। जिसमें से एक मामला यह था कि मलिक ने कूटरचित ,झूठे सपथपत्र के आधार पर राजकीय भूमि को हड़पने का कार्य किया। नजूल भूमि पर कब्जा करके प्लॉटिंग, अवैध निर्माण कर बेचा गया।
जब जिला व पुलिस प्रसाशन की टीम अवैध अतिक्रमण को हटाने गई तो उनपर पथराव किया गया। बाद में इसने दंगा का रूप ले लिया। इसी दंगे में सरकारी, पुलिस व अन्य लोग घायल हो गए पांच लोगों की जान चली गयी। आरोपितों का कहना है कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एफआईआर में उनका नाम नहीं है। पुलिस ने जबरन इस मामले में फंसाया है।
यह भी पढ़ें- बनभूलपुरा दंगा: 86 आरोपितों को मिली जमानत, मुख्य अभियुक्त अब्दुल मलिक अभी भी जेल में
यह भी पढ़ें- Haldwani Riot: हाई कोर्ट से बनभूलपुरा दंगा के मुख्य आरोपित को झटका, नहीं मिली जमानत |
|