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RTI का जवाब न देना पड़ेगा भारी, अधिकारी-कर्मचारियों की सैलरी से कटेगा जुर्माना; हरियाणा सरकार का सख्त आदेश

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आरटीआई जवाब न देने पर वेतन-पेंशन से वसूली होगी (फाइल फोटो)



राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) का जवाब नहीं देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर सरकार सख्त हो गई है। जुर्माना नहीं चुका रहे अधिकारियों-कर्मचारियों के वेतन और सेवानिवृत्त हो चुके लोगों की पेंशन से हर महीने एकमुश्त राशि काटी जाएगी। इसी तरह सरपंचों के मामलों में जुर्माना राशि की वसूली उनके मानदेय से 3000 रुपये प्रतिमाह की दर से की जाएगी।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों एवं निगमों के मुख्य प्रशासकों एवं प्रबंध निदेशकों, मंडल आयुक्तों और उपायुक्तों को निर्देशित किया है कि सूचना का अधिकार आयोग द्वारा लगाए गए दंड की समयबद्ध वसूली सुनिश्चित करें।

राज्य सूचना आयोग द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के अंतर्गत सूचना उपलब्ध कराने में विलंब के मामलों में दोषी राज्य जन सूचना अधिकारियों (एसपीआईओ) पर प्रति मामले 250 रुपये प्रतिदिन की दर से अधिकतम 25 हजार रुपये तक दंड लगाया जाता है। वर्तमान में विभिन्न विभागों से संबंधित एसपीआईओ पर लगाए गए दंड में से करीब दो करोड़ 95 लाख रुपये से अधिक की राशि लंबित है।

राहत की बात यह कि प्रदेश सरकार ने एकमुश्त वसूली के स्थान पर मासिक किस्तों में वसूली की स्वीकृति दी है, ताकि संबंधित अधिकारियों पर अत्यधिक आर्थिक बोझ न पड़े। संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण के आहरण एवं वितरण अधिकारी (डीडीओ) द्वारा संबंधित अधिकारियों के वेतन या पेंशन से मासिक कटौती की जाएगी। क्लास-ए अधिकारियों से सेवा के दौरान 10,000 रुपये प्रतिमाह तथा सेवानिवृत्त होने की स्थिति में 5,000 रुपये प्रतिमाह वसूले जाएंगे। क्लास-बी अधिकारियों से सेवा के दौरान 7,000 रुपये प्रतिमाह व सेवानिवृत्त होने पर 3,500 रुपये प्रतिमाह की दर से वसूली की जाएगी।

इसी प्रकार क्लास-सी कर्मचारियों से सेवा के दौरान 4,000 रुपये प्रतिमाह तथा सेवानिवृत्त होने पर 2,000 रुपये प्रतिमाह की दर से राशि वसूल की जाएगी। यह प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से लागू होगी और संपूर्ण बकाया राशि की वसूली तक जारी रहेगी। निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर संबंधित राज्य जन सूचना अधिकारी का निधन हो चुका है, तो अधिनियम के अंतर्गत लगाया गया दंड माफ कर दिया जाएगा और किसी प्रकार की वसूली नहीं की जाएगी।

सभी प्रशासनिक सचिवों एवं विभागाध्यक्षों को अपने-अपने विभागों में इन आदेशों के अनुपालन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के लिए कहा गया है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि डीडीओ स्वीकृत वसूली कार्यक्रम का कड़ाई से पालन करें। उन्हें वसूली की प्रगति एवं शेष बकाया राशि से संबंधित सावधि स्थिति रिपोर्ट राज्य सूचना आयोग को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
सरपंचों के मानदेय से काटे जाएंगे 3000 रुपये

ग्राम पंचायतों के कार्यरत सरपंचों के मामलों में दंड राशि की वसूली उनके मानदेय से 3,000 रुपये प्रतिमाह की दर से की जाएगी। पूर्व सरपंचों के मामले में स्वेच्छा से राशि जमा न कराने की स्थिति में संबंधित विभाग ऐसे मामलों को संबंधित जिला उपायुक्त को भेजेंगे करेंगे, ताकि लागू राजस्व कानूनों अथवा उपयुक्त वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र के अंतर्गत वसूली की कार्रवाई की जा सके। राज्य सूचना आयोग तथा पंचायत एवं विकास विभाग को इन मामलों में आपसी समन्वय से प्रभावी वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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